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देवभूमि उत्तराखंड तृतीय केदार तुंगनाथ  से हिमालय के दिव्य दर्शन !

चंद्रशिला जहाँ चंद्रमा ने शापमुक्ति के लिए कठोर तपस्या की।

देवभूमि उत्तराखंड तृतीय केदार तुंगनाथ  से हिमालय के दिव्य दर्शन !
चंद्रशिला जहाँ चंद्रमा ने शापमुक्ति के लिए कठोर तपस्या की।

गढ़वाल हिमालय का सबसे सुंदर और भव्य पर्यटन स्थल है – दुग्गलबिटा, चौपता, तुंगनाथ और चंद्रशिला सर्किट।
देहरादून से छह घंटे की कार यात्रा से चौपता पहुंचा जा सकता है। नोएडा के युवा पर्यटक ग्यारह घंटे में चौपता पहुंच रहे हैं।
चौपता बुग्याल का फैलाव बनिया कुंड से लेकर दुग्गलबिटा तक है।

टूरिस्ट यहां हर मौसम में आना चाहते हैं और हिमालय, बुग्याल और बर्फ से खेलने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल, पंजाब, बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि प्रदेशों के टूरिस्ट यहां बार – बार आना चाहते हैं।

चौपता में वन विभाग एक सौ पचास रूपये प्रति टूरिस्ट वसूल रहा है। यह वसूली ना जाने कौन से मापदंड से तीन दिन के लिए की जा रही है।

 


पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग के मुखिया सहित दो दर्जन अधिकारी बदल दिए लेकिन वन विभाग की कार्यशैली सुधर नहीं पा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने दो भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को अपनी टीम में रखा लेकिन यह डिलिवरी देने में असफल रहे हैं।

 

चौपता से तुंगनाथ मंदिर दर्शन को जाने वाले पर्यटक और तीर्थयात्री डेढ़ सौ प्रतियात्री चुका रहा है लेकिन यात्रियों को सुविधा व सुरक्षा ना के बराबर है।

आजकर तुंगनाथ और चंद्रशिला मार्ग पर बर्फ पड़ी है और हजारों रूपये रोजाना वसूलने वाला वन विभाग सुरक्षित मार्ग नहीं बना पा रहा है।

फलस्वरूप यात्री बर्फ में फिसलकर गिर रहे हैं और चोट खा रहे हैं।  मार्ग पर जलपान की दुकानें यात्रियों को चाय, नाश्ते के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं।

CHADRA SHILA TUNGNATH
PIC – BHUPAT SINGH BIST

चौपता से औसतन तीन घंटे में पर्यटक तुंगनाथ मंदिर पहुंच जाते हैं।  तुंगनाथ से चंद्रशिला पहुंचने में एक घंटा और लगता है।

मान्यता है कि चंद्रशिला में चंद्रमा ने शाप मुक्ति हेतु कठोर तपस्या की है। तुंगनाथ के शिखर पर चमकने वाली यह चोटी युवा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

कहा जा रहा है कि हिमाचल के मंहगे और भीड़ वाले स्थलों की अपेक्षा अब उत्तराखंड टूरिस्टों की पहली पसंद बन रहा है। तुंगनाथ और चंद्रशिला से हिमालय के मनोरम शिखर सबका मनमोह रहे हैं।

चौपता से तुंगनाथ के मध्य बुगयाल, घाटियों की निर्मल हरियाली मंत्रमुग्ध कर देती है। चौपता, तुंगनाथ व चंद्रशिला अब यू टयूब चैनल पर छाए हुए हैं और नई पीढ़ी के युवा बड़ी संख्या में कोरोना को धता बताकर पहुंच रहे हैं।

स्थानीय लोगों की आय में चौपता, देवरियाताल, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मधमहेश्वर का योगदान बना रहे सो सरकार को ठोस योजना बनानी होगी।
— भूपत सिंह बिष्ट

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