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राष्ट्र भाषा हिन्दी – राजभाषा हिन्दी के मायने और जन जीवन में 14 सितंबर की गंभीरता!

हिन्दी भाषा क्या उच्च स्तर तक आ चुकी है या अभी बोलने, लिखने और पढ़ने में अंग्रेजी की चुनौती बनी हुई है।

राष्ट्र भाषा हिन्दी – राजभाषा हिन्दी के मायने और जन जीवन में 14 सितंबर की गंभीरता!
हिन्दी भाषा क्या उच्च स्तर तक आ चुकी है या अभी बोलने, लिखने और पढ़ने में अंग्रेजी की चुनौती बनी हुई है।

– संदीप एम खानवलकर

हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी भाषी राज्यों में राष्ट्रभाषा के रूप में हम सब एक दूजै को हिंदी दिवस की बधाई देकर अपने कत्र्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं।

 

राष्ट्र भाषा और राजभाषा में क्या अंतर है – अभी बहुत कुछ जानना बाकि है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय को राजभाषा क्रियान्वयन का दायित्व मिला है।

इस कारण केंद्र सरकार के मंत्रालय, संस्थायें और निगम हिंदी सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा मनाकर राजभाषा हिंदी के प्रचार – प्रसार की अपनी औपचारिक भूमिका निभा रहे हैं।

पंजाब नैशनल बैंक के पूर्व मुख्य प्रबंधक संदीप खानवलकर बता रहे हैं कि 14 सितंबर को हम हिंदी के प्रचार – प्रसार के लिए नए संकल्प के साथ मना सकते हैं।

संदीप खानवलकर ने एक भेंट वार्ता में बताया – राजभाषा अधिनियम 1963 के तहद हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिला है।

हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा भी राजकाज की भाषा के रूप में पहले से प्रयोग में लायी जा रही है। विशेषकर कानून निर्माण, उच्च न्यायालय के काम काज की भाषा, संसद में और राजकीय प्रायोजनों में अंग्रेजी का प्रयोग बना हुआ है।

आजादी के अमृत महोत्सव यानि 75 साल बाद भी राजभाषा से राष्ट्रभाषा का सफर अभी हिंदी को तय करना है।

संभवता भारत जैसे विविध संस्कृति और भाषा के विशाल देश में एक भाषा का फार्मूला लागू करना व्यवहारिक नहीं है। इसीलिए देश में त्रिभाषा फार्मूले पर हम आगे बढ़ते जा रहे हैं।

त्रिभाषा फार्मूेले में हिंदी, अंग्रेजी के साथ प्रांतीय भाषा को भी शामिल किया गया है और ये आज भी व्यवहारिक बना हुआ है।

हिंदी धीरे – धीरे पूर्व – पश्चिम से लेकर दक्षिण तक अपनी जगह बनाती जा रही है। किसी पर भाषा थोपकर हिंदी का भला होने वाला नहीं है।

दक्षिण भारत में जहां कभी हिंदी का जर्बदस्त विरोध देखने को मिलता था अब आर्थिक लाभ के लिए हिंदी फिल्मों में, गीत – संगीत, विज्ञापन और बिजनेस में घर करती जा रही है।

देश के क क्षेत्र में हिंदी बोलने व समझने वालों का बहुमत है। अब क क्षेत्र के निवासियों का दायित्व है कि अपने दैनिक काम काज में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें ताकि हिंदी स्वाभाविक तौर पर राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित हो जाये।

 


ख व ग क्षेत्र में प्रांतीय भाषा के साथ अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिंदी को स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत है।

आज कंम्पयूटर युग में भाषा की सीमायें टूट गई हैं। अब यूनिकोड लिपी का प्रयोग करके सभी प्रांतीय भाषायें राजकाज में हिंदी के साथ स्थापित हुई हैं।

किसी भी भाषा के विकास में अब बाजार की स्वीकार्यता भी अनिवार्य बन चुकी है। अंग्रेजी से हिंदी या आंचलिक भाषाओं का हिंदी अनुवाद सुलभ होने से हिंदी का स्वाभाविक विकास हो रहा है।

हिंदी भाषी लोगों को अपनी क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों का चयन और प्रयोग हिंदी को समृद्ध करने में करना होगा तभी हम एक दूसरे की भाषा को अंगीकार कर पायेंगे।
पदचिह्न टाइम्स।

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