अनोखा सामूहिक वस्त्र बुनने का त्यौहार कठिन चीवर दान !
सार्वजनिक स्थल पर पूजा के बाद खाम्टी महिलायें अपने बुनाई कौशल से लामाओं के लिए वस्त्र तैयार करती है।

अनोखा सामूहिक वस्त्र बुनने का त्यौहार कठिन चीवर दान !
सार्वजनिक स्थल पर पूजा के बाद खाम्टी महिलायें अपने बुनाई कौशल से लामाओं के लिए वस्त्र तैयार करती है।
अरूणाचल प्रदेश के नामसाई जिले में हर वर्ष बौद्ध लामाओं के लिए वस्त्र बुनाई का सार्वजनिक पर्व
आयोजित होता है।

यह पर्व नामसाई के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल गोल्डन पगोड़ा में आयोजित हुआ। गाँव की महिलाओं ने
अपनी बुनाई का कौशल सार्वजनिक स्थल में किया।
कठिन चीवर दान – नामक इस पर्व में आसपास गांव की महिलाओं ने सहकारिता से सबके सामने
बोद्ध लामा लोगों के लिए जरूरी वस्त्र निर्माण कार्य संपन्न किए।

सार्वजनिक स्थल पर हैंडलूम और करघा लगाने की मुश्किल के साथ अरूणाचल की खाम्टी महिलाओं ने
वस्त्र निर्माण कार्य में सूर्योदय से पहले काम समाप्त करने की चुनौती को भी पार किया।
नामसाई की बौद्ध महिलायें पगौड़ा अथवा गोम्पा मंदिर के लामा लोगों के लिए हाथ से वस्त्र
बुनकर दान करती है। यह परम्परा खाम्टी समाज में सदियों से चली आ रही है।

यह आयोजन कार्तिक माह की पूर्णिमा तक संपन्न कराये जाते हैं। अपने स्थानीय कलैंडर के
अंतिम माह में 15 तारीख से पहले इस आयोजन को अनेक बार कराया जा सकता है। धार्मिक दान दायित्व
पूर्ति के साथ यहां जनजाति समाज अपनी जड़ों से मजबूती बनाये हुए है।
इस पर्व की चुनौती है कि बुनकर महिलाओं को अष्टशील धारण करने के बाद सफेद वस्त्र धारण
करने होते हैं।
एक सार्वजनिक क्षेत्र में घेरा बनाकर करघा और हैंडलूम स्थापित किया जाता है। महिलायें इस खुले घेरे के
भीतर रिकार्ड समय (सूर्योदय से पहले एक दिन में) जितना कपड़ा बुन पाती हैं, वहीं लामा लोग धार्मिक पूजा
के बाद अन्य सामग्री के साथ ग्रहण करते हैं।

यह खाम्टी त्यौहार प्रत्येक वर्ष अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ धर्म गुरूओं के प्रति गहरे लगाव को
प्रदर्शित करता है।
यह वस्त्र दान पर्व 5 नवंबर को गोल्डन पगोड़ा परिसर नामसाई, अरूणाचल प्रदेश में धूमधाम से
आयोजित हुआ।
– भूपत सिंह बिष्ट, स्वतंत्र पत्रकार।



