
तो कब तक बच गई पंजाब में आप की भगवंत मान सरकार !
विशेष विधानसभा सत्र में भगवंत मान सरकार ने हासिल कर लिया विश्वास मत।
आप पार्टी के 7 राज्य सभा सदस्य तोड़ कर राघव चड्ढा ढीले पड़ गए हैं और इस बीच पंजाब की आप सरकार
ने एक दिन का विशेष सत्र आहूत कर विश्वास मत प्रस्ताव पास करा लिया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आप में चल रही तोड़ फोड़ से काफी चिंतित थे ना जाने कब उनके
विधायक लेकर राघव चड्ढा छू मंत्र हो जाएँ।
एक मई को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया
और पंजाब की राजनीति को लेकर चल रही तमाम अफवाहों पर फिलहाल विराम लगाया है।
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सदस्य हैं और आप विधायकों की संख्या मजबूत 94 है।
कांग्रेस – 16 , शिरोमणि अकाली दल – 3 ,बीजेपी -2 ,बसपा -1 और निर्दलीय एक विधायक विपक्ष में हैं।
एक मई के सत्र में कांग्रेस और अन्य दलों ने बहिष्कार किया तथा बीजेपी ने सत्र में भाग नहीं लिया।

विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री पर नशीला सेवन करने का आरोप भी लगाया।
आप पार्टी अपने 7 राज्य सभा सदस्य खोने के बाद हर कदम फूंक – फूंक कर रख रही है और अरविन्द केजरीवाल
संयोजक आम आदमी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस के निशाने पर चल रहें हैं।
राज्य सभा में पार्टी के दस में सात सांसद दल बदल कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और अब राहत सुप्रीम कोर्ट
से ही मिलनी बाकि है। आप पार्टी को अगले दल बदलुओं का जोरदार धक्का कब लगता है – सब बेसब्री से
इंतज़ार कर रहें हैं।

आप का ग्राफ जिस तेज़ी से चढ़ना शुरू हुआ , अब उसी तेज़ी से उतरना शुरू हो चुका है। अरविन्द केजरीवाल
की तानाशाही से त्रस्त होकर आप छोड़ने या निकाले जाने वालों की लम्बी फेहरिस्त सामने है।

संविधान प्रक्रिया के अनुसार विधानसभा का सत्र छह माह में एक बार आयोजित करना विधिक अनिवार्यता है।
इस कारण पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान अगले 6 माह के लिए निश्चिंत हो सकते हैं। राघव चड्डा समूह
का इस्तेमाल बीजेपी पंजाब में करना चाहती है और 2027 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं।
आप छोड़ कर बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों का कार्यकाल लगभग 2 साल बचा है और सुप्रीम कोर्ट से
आप को कब तक राहत मिलती है – यह भी लाख टके का सवाल है !
- भूपत सिंह बिष्ट द्वारा
- पदचिह्न टाइम्स।



