शिखर फाल से दूनघाटी में ऋषिपर्णा का अवतरण !
नेताओं में भगीरथ पुरूषार्थ शेष नहीं बचा या राजनीति जुमलों में सिमट गई

शिखर फाल से दूनघाटी में ऋषिपर्णा का अवतरण !
नेताओं में भगीरथ पुरूषार्थ शेष नहीं बचा या राजनीति जुमलों में सिमट गई
देहरादून का पुराना शहर कभी रिस्पना और बिंदाल नदी के बीच सिमटा हुआ था।
अंग्रेजों ने अपने नगर बसाने के कौशल अनुरूप देहरादून को ईस्ट कैनाल रोड़ व वेस्ट कैनाल रोड़
का तोहफा दिया – कभी यह नहरें नगर के पर्यावरण को सहेज कर बहती थी।
मौथरोवाला से लेकर, माजरा, निरंजनपुर और काँवली ग्राम के खेतों में गेहूँ व बासमती की
फसल को सिंचाई हेतु जल इन्ही नहरों से मिलता था।
नहरों को साफ – सफाई से रखने के कानून निर्मल जल की गारंटी होते थे।
यह नहरें गर्मी से भी शहरवासियों को सकून देती, रोज़गार के लिए आटा पीसने के घ्राट
(पन चक्की)चलते और पशुओं को पीने का पानी नसीब होता था।
दिलाराम बाजार में स्थापित वाटर वर्क्स अंग्रेजों की देहरादून को अनुपम देन
है — नगरवासियों की प्यास बुझाने के लिए दूरदराज शिखरों की तलहटी में बसे राजपुर
जैसे गांवों से पानी के प्राचीन सीआई पाईप और नहर अंग्रेजों के शासन – प्रशासन की तारीफ
करने और सबक सीखने के लिए आज भी मौजूद हैं।
बारामासी नदियों के जल के लिए जरुरी है की चौड़े पत्तों वाले वृक्षों और वनस्पति बहुतायत में हों।
तभी भूमि की पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है।
अन्यथा ग्लेशियर पिघलने से ही नदियों में जल मिलता है और बरसात का जल बर्बाद होता है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने मुख्यमंत्री काल में दूनवासियों को एक सपना दिखाया
था – रिस्पना नदी का पुर्नोद्धार कर ऋषिपर्णा नदी को एक बार फिर से जीवनदान मिलेगा।
रिस्पना को ऋषिपर्णा का स्वरूप देना निसंदेह भगीरथ प्रयास है और त्रिवेंद्र जी इस चुनौती
को भली भांति समझते हैं।
राजपुर में मुख्यधारा शिखर फाल से लेकर करनपुर, धर्मपुर या मौथरोवाला तक रिस्पना के
तट पर वैध – अवैध कब्जों और बस्तियों को हटाना कल्पना में तो संभव है लेकिन यथार्थ में
पोलिटिकल इच्छा शक्ति के बिना नामुमकिन है।
यह पर्यावरण परियोजना नहीं, अपितु अवैध कब्जा हटाने के लिए वोट बैंक और भू माफियाओं के
विरूद्ध महाभारत छेड़ने से कमतर भी नहीं है।
अब त्रिवेंद्र सिंह रावत के सरकार से हटते ही ऋषिपर्णा नदी का सपना ठंडे बस्ते में जा चुका है।
अधिकारियों का सर्वे, लाखों पेड़ लगाने के दावे और देहरादून अस्थायी राजधानी को विश्वस्तरीय
महानगर बनाने का दावा भी धूल धूसरित हो गया है।
आज शिखर फाल जो युवाओं में शेखर फाल के नाम से भी जाना जाता है।
निरंकुश टूरिस्ट प्वांइट बना हुआ है और आसपास के कालेज छात्र – छात्रायें यहां मौज मस्ती
करते देखे जा सकते हैं।
अब एक नए भगीरथ की प्रतीक्षा रहेगी — जो नाले में तबदील रिस्पना को फिर से ऋषिपर्णा के
रूप में सजीव करने का बीड़ा उठाये।
फिलहाल तो दूनवासियों को गर्मी में पीने का पानी नसीब हो जाये, यही गनीमत है।
अन्यथा किसी दिन ऋषिकेश से गंगा और विकासनगर से यमुना का जल नहर और पाइप में
अस्थायी राजधानी दून तक लाने की परियोजना भी बनानी होगी।
— भूपत सिंह बिष्ट