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बेदनी बुग्याल में जय माँ नंदा और जय लाटू देवता की जय जयकार !

नंदा राज जात यात्रा - 2014 हिमालय की गोद में बेदनी में बसा माँ का अस्थायी नगर

बेदनी बुग्याल में जय माँ नंदा और जय लाटू देवता की जय जयकार !

नंदा राज जात यात्रा – 2014 हिमालय की गोद में बेदनी में बसा अस्थायी नगर

 

BEDNI BUGYAL 2014PIC – BHUPAT SINGH BIST

आंख खुली तो भोर का प्रकाश अंदर झाँक रहा था।
पांच रात और 6 दिन घर छोड़े हुए हो गए थे।
बेदनी बुग्याल में माँ नंदा के प्रताप एक अस्थायी नगर बस चुका था और

उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से और प्रवासी नंदा भक्त अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे।

MAA NANDA DEVI

निम के प्रिंसीपल कर्नल कोठियाल और गढ़वाल मंडल विकास निगम ने टैंट कालोनियां बनायी थी।

श्रद्धालुओं ने यात्रियों के लिए लंगर की व्यवस्था प्रकृति की गोद में की हुई थी।
बेदनी कुंड और मंदिर में पूजा पाठ और तर्पण आयोजन से पूरा माहौल धार्मिक हो गया था।

BEDNI BUGYAL 2014PIC – BHUPAT SINGH BIST

सरकार के चकड़ैत लोगों के लिए वीआईपी कमोड, बाथरूम के शीसे और

सुविधायें हेलिकोप्टर से बेदनी में सजायी गई।

प्रकृति के इस रमणीय दृश्य को छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था।
घर वापसी के लिए सामान बेमन से समेट लिया और वापिसी के लिए घोड़ा देखने निकल पड़े

ताकि हमारा वजनी सामान पिठ्ठू औरज तम्बू वापस बाण तक पहुंचाया जा सके।

PIC – BHUPAT SINGH BIST

काफी प्रयत्न के पश्चात भी हमें ना तो घोड़ा मिला और न ही मजदूर।
एक नई समस्या उभर रही थी l

क्योंकि घोड़े वाले और मजदूर सामान को बाण से बेदनी बुग्याल

में लाकर पटक देते और शीघ्र ही वापस चले जाते।

ताकि बारह वर्षो पश्चात आया कमाई का ये मौका बेकार न चला जाये।

वापिस बाण गांव में कई यात्री बेदनी तक पहुंचने के लिए घोड़े की बेसब्री से प्रतीक्षारत थे।

BEDNI BUGYAL 2014PIC – BHUPAT SINGH BIST

तभी माँ नंदा की कृपा हुई और पौड़ी के कुछ यात्री जो भूपत बिष्टजी के परिचित थे – संभवत

पौड़ी के जिला पंचायत अध्यक्ष केसर सिंह नेगी जी के भांजे और उनके मित्रों की टोली में थे।

ये लोग बेदनी बुग्याल से आगे क्रमशः पातर नचोनिया, केलुविनायक, रूप कुंड, जुरागली,

शिला समुद्र और आखिरी पड़ाव होमकुण्ड तक जा रहे थे और दो – तीन मजदूर(नेपाली ) भी

 

इन के साथ चल रहे थे।

ये आगे की यात्रा के लिए राशन पानी, टेंट, सब्ज़ी,दूध आदि से लदे हुए थे।
उन्हें तम्बू की जरूरत थी क्योंकि पोलीथीन का उनका टैंट कामयाब नहीं था।

उन की यात्रा सुखद बनाने के लिए अपना तम्बू बिष्टजी ने उन्हें दे दिया और वापिसी में

तम्बू को पौड़ी केसर सिंह नेगी जी के होटल में पहुंचाने का आश्वासन लिया।

अब हमारा भार काफी कम हो चुका था अभी भी हम बारिश के प्रकोप से बचे हुए थे।
बाकी सामान जिसमे हमारे कपड़े और स्लीपिंग बैग थे अपनी अपनी पीठ पर लाद कर वापिसी के

लिये बाण की ओर लाटू देव और माँ नंदा का नाम लेकर बेदनी से प्रस्थान कर दिया।

थोड़ी बहुत बारिश जो हल्की फुहार के रूप मे मिली थी उसे भी माँ का आशीर्वाद मान

अपने को बहुत धन्यभागी महसूस कर रहे थे।

BEDNI BUGYAL 2014PIC – BHUPAT SINGH BIST

विश्व की ऐसी अद्भुत यात्रा में भाग लेकर इस जन्म की यात्रा को सफल मान

हम ने मन ही मन परमात्मा का धन्यवाद दिया।

आठ – नौ वर्ष बीतने के उपरांत भी यात्रा के जीवन्त दृश्य मन मस्तिष्क के

पटल पर सजीव हो रहे हैं।
पहाड़ो पर चढ़ने में तो आसानी होती है पर उतरने मे जोखिम ज्यादा है।
घोड़ो और मनुष्यों के चलने के कारण सड़क पर फिसलन और बची खुची कसर

बारिश रास्ते को अत्यंत ही विकट बना देती है l
एक- एक कदम टेककर रखना पड़ता है ताकि कोई दुर्घटना न हो जाये।

तीन चार घंटे की जान जोखिम मे डालने वाली ढलान उतरने के पश्चात बाण वापिस पहुंचे

और अगले दिन सांय तक लाटू देव और माँ नंदा की कृपा से सुरक्षित अपने – अपने घरों में पहुँच गए।

मेरा निवेदन है कि यदि पहाड़ो में ट्रेकिंग का शौक है तो अवश्य इस यात्रा में शामिल हो,

हिमालयी जन जीवन और संस्कृति का साक्षात्कार करें।
नंदा राजजात आप के जीवन को सार्थक करेगी।
अगली राज जात यात्रा संभवता 2026 में होगी। रोजाना पाँच सात किमी पैदल चलने

की आदत से यात्रा में कोई परेशानी न होगी।

स्मरण रहे – ये यात्रा बहुत ही ख़तरनाक हैं और सदियों पुराने कँकाल आज भी

रूपकुण्ड में विराजमान हैं।
ऐसी अविस्मरणीय और दुर्लभ यात्रा का वृतांत शब्दो द्वारा व्यक्त करने का छोटा सा मेरा प्रयास है

ताकि इतने बड़े हिमालयी कुम्भ के बारे में थोड़ा बहुत मुझ जैसा नादान भी जोड़ सके।
भूलवश, त्रुटि हो गई हो तो छोटा जानकर माफ़ करने की कृपा करें।

🌹जय माँ नंदा जय लाटू देवता🌹
(समापन किश्त)
— सुभाष मंजखोला

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