शिवरात्रि विशेष : खो गया बचपन – स्मार्ट फोन में सिमट गई जिंदगी !
लोग मोबाइल की दुनिया में इस कदर भटक गए हैं कि अगर ईश्वर भी उन के पास आकर लौट जायें तो भी उन्हें मालूम नही चलेगा।

शिवरात्रि विशेष : खो गया बचपन स्मार्ट फोन में सिमट गई जिंदगी !
लोग मोबाइल की दुनिया में भटक गए हैं – अगर ईश्वर भी उन के पास आकर लौट जायें तो भी उन्हें मालूम नही चलेगा।
— भूपत सिंह बिष्ट
इन दिनों दक्षिण भारत में ” शिव विवाह” की तैयारी जोर शोर से चल रही हैं। शिवरात्रि से सप्ताह पूर्व मनाये जाने वाले इस त्यौहार में गाँव की परिक्रमा, शिव मंदिरों की सजावट और परदेश गए लोग अपने परिजनों के बीच लौटते हैं।
कोलार, कर्नाटक -देवरियासमुद्र के शिवबाला रूद्रेश्वर बाबा जी के आश्रम में भी चहल – पहल का माहौल है। यहां मलेशिया से बाबा जी के अनुयायी शिवरात्री पर्व मनाने पहुँच रहे हैं। वहां बाबा जी का सानिध्य प्राप्त हुआ।
बाबा जी ने बताया कि अब सबकी दुनिया मोबाइल में ही सिमटती जा रही है। पुस्तकों के प्रति लगाव कम हो रहा है। लोग मोबाइल की दुनिया में इस कदर भटक गए हैं कि अगर ईश्वर भी उन के पास आकर लौट जायें तो भी उन्हें मालूम नही चलेगा।
— आश्रम में पहुंचे एक अनुयायी ने बताया कि दो साल पहले तक मेरे पास भी साधारण मोबाइल था और अमेरिका में बसे बेटे ने आग्रह किया कि मैं स्मार्ट फोन लूं। तब मैंने जवाब दिया — मैं स्मार्ट नहीं हूँ सो स्मार्ट फोन कैसे चलाऊँगा ? इस बार उस ने मुझे यह स्मार्ट फोन देकर कहा – इस मोबाइल को देखकर सब आप को स्मार्ट ही कहेंगे।
इस सत्संग में अंग्रेजी के धुरँधर वरिष्ठ नागरिक ने आपत्ति उठायी — gm, gn, tq जैसे शब्दों ने भाषा व संस्कृति को नष्ट करना शुरू कर दिया है। अब हर शब्द और सोच को छोटा करना स्मार्टपन कहा जा रहा है।
एक अन्य शिष्य का मानना था कि – GPRS ने स्थानों को ढूँडना आसान बना दिया है लेकिन सेल्फी का रोग अब हर उम्र में आ गया है।
पदचिह्न टाइम्स