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अब महाराष्ट्र में एनसीपी का डिप्टी मुख्यमंत्री – क्या है बीजेपी की मजबूरी !

महाराष्ट्र में पहले शिवसेना के एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया अब अपने विरोधी महाविकास अगाड़ी के प्रमुख घटक एनसीपी के साथ गठबंधन।

अब महाराष्ट्र में एनसीपी का डिप्टी मुख्यमंत्री – क्या है बीजेपी की मजबूरी !

महाराष्ट्र में पहले शिवसेना के एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया अब अपने विरोधी महाविकास अगाड़ी के

प्रमुख घटक एनसीपी के साथ गठबंधन।

2024 लोकसभा चुनाव से पहले देश की राजनीति में शर्मनाक अध्याय जुड़ते जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का शंखनाद करते हुए विपक्ष को

भ्रष्टाचार का कुनबा बताया और गारंटी दी कि देश के संसाधनों की लूट करने वालों को हिसाब चुकाना होगा।

महाराष्ट्र विधानसभा में 54 विधायक और 4 लोकसभा सांसद वाली शरद पवार की एनसीपी पर

70 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप बताया था।
एनसीपी के कुछ नेता प्रवर्तन निदेशालय की जांच के चलते अभी जेल में हैं।

अब अचानक अजीत पवार को बीजेपी ने अपनी सरकार में डिप्टी मुख्यमंत्री बना दिया है।

ईडी की जांच झेल रहे छगन भुजबल और अन्य आठ एनसीपी विधायक मंत्री बनाये गए हैं।

चर्चा है कि ईडी जांच झेल रहे प्रफुल्ल पटेल केंद्र में मंत्री बनाये जा सकते हैं।

नए गठबंधन साथियों को एडजस्ट करने में बीजेपी के अपने विधायक उपेक्षित चल रहे हैं।
अभी तक बीजेपी एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस की महाविकास अगाड़ी सरकार पर

तमाम भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगाती रही है।

अब पुरानी सरकार के दो विरोधी धड़े बीजेपी सरकार में शामिल किए गए हैं।
बीजेपी ने अपने बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पिछले एक साल से

उपमुख्यमंत्री बनाया हुआ है।

विश्व की सबसे बड़ी पार्टी महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में चल रही है।

इन परिस्थितियों में 2024 का रण आसान नजर नहीं आ रहा है।
विपक्षी नेता अगर भ्रष्ट हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व वाली

बीजेपी में इन को जगह नहीं मिलनी थी।

 


आखिर बीजेपी अपने दम पर 2019 लोकसभा में 303 सीट जीती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी – शिवसेना की महाराष्ट्र सरकार और पूर्व गवर्नर पर

तीखी आलोचना की है और मामला अभी भी स्पीकर के विचाराधीन है।

महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीट हैं। बीजेपी 105, शिवसेना शिंदे 40 और

अन्य के सहयोग से सरकार पूर्ण बहुमत में चल रही है।

एनसीपी अजीत पवार के 40 विधायकों के साथ गठबंधन सरकार का आंकड़ा

अब दो सौ पार कर गया है।

मात्र 53 विधायकों वाली एनसीपी महाराष्ट्र सरकार में दूसरी बार शामिल हुई है।

ऐसे में नेतागिरी के बिजनेस माडल को समझना बिलकुल आसान है।

एक साल सत्ता भोग चुकी बीजेपी को महाराष्ट्र विधानसभा का नया जनादेश हासिल कर

भ्रष्ट विपक्षी नेताओं के साथ गठबंधन तोड़ देना ज्यादा श्रेयकर था।

महाराष्ट्र में बीजेपी चुनाव से बचती दिख रही है और विपक्षी दलों को तमाम

आरोप लगाने के मौके मिल रहे हैं।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी

और कांग्रेस सीधे मुकाबले में हैं।
अब महाराष्ट्र की नई गठबंधन सरकार और अशांत मणिपुर के हालात बीजेपी

आलोचना के नए मुद्दे बन रहे हैं।
पदचिह्न टाइम्स।

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