
रिमोट इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन का प्रदर्शन अगली 16 जनवरी को !
31 जनवरी तक 8 रजिस्टर्ड राष्ट्रीय दल 57 स्टेट पार्टियां चुनाव आयोग को अपनी सहमति देंगे।
प्रवासी वोटरों की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है।
चुनाव में मतदान प्रतिशत कम रहने के पीछे प्रवासी वोटरों को भी प्रमुख कारण माना जाता है।
नौकरी के लिए देश – विदेश पलायन कर गए वोटरों के लोकतांत्रिक अधिकार को संरक्षित करने के लिए
चुनाव आयोग वर्षों से विचार कर रहा है।
इस में इलेक्ट्रोनिक पोस्टल वोट, प्रोक्सिवोट और अब रिमोट इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन का
प्रदर्शन चुनाव आयोग करने जा रहा है।
आगामी 16 जनवरी को चुनाव आयोग 8 राष्ट्रीय दलों और राज्य की 57 मान्यता प्राप्त पार्टियों के प्रतिनिधियों के
मध्य नई वोटिंग मशीन का प्रदर्शन करेगा।
उम्मीद की जा रही है कि प्रवासी वोटर इस मशीन पर कहीं से भी अपना वोट डाल सकते हैं।
चुनाव आयोग का दावा है कि इस मशीन से दूसरे राज्यों से अपनी विधानसभा और लोकसभा में
वोट डालना संभव हो जायेगा।
यानि अब एक मतदान स्थल में ही विभिन्न स्थानों के लिए रिमोट इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन से
वोट डालना संभव हो जायेगा।
इस मशीन का प्रोटोटाइप 16 जनवरी को प्रदर्शित होगा और 31 जनवरी तक मान्यता प्राप्त दलों को
अपने लिखित सुझाव देने हैं।
बीजेपी ने इस प्रयास का स्वागत किया है।
वामदलों, जनता दल यूनाइटेड और तेलगु देशम भी प्रोटो टाइप प्रदर्शन में शरीक हो रहे हैं।
लेकिन कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया है।
कांग्रेस का मानना है कि मशीन पर विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग को विपक्षी दलों के
सुझाव पर भी अमल करना जरूरी है।
गुजरात चुनाव में अंतिम घंटों में वोटिंग प्रतिशत का आंकड़ा कई गुना बढ़ा है।
वीवीपेट मशीनों का प्रयोग और गिनती भी नहीं बढ़ायी गई है।
बताया जा रहा है – एक रिमोट वोटिंग मशीन पर 72 विधानसभाओं के लिए वोट डाले जा सकते हैं।
चुनाव आयोग की परेशानी ये भी है कि प्रवासी मजदूर अपनी गृह विधानसभा से नाम कटवाने या
कार्य स्थल पर जुड़वाना नहीं चाहते हैं।
न ही वोट डालने के लिए वो दूसरे राज्य से अपने मतदान केंद्र में आते हैं और ऐसे वोटरों की संख्या
लगभग 30 फीसदी रहती है।
चुनाव आयोग इस प्रयोग को 2023 की विधानसभा चुनावों में अजमाने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में
शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
पदचिह्न टाइम्स।