
फिर गठबंधन सरकार का दौर शुरू नरेंद्र मोदी की तीसरी पारी !
तेलगु देशम और जनता दल यूनाइटेड तमाम विरोधाभास के साथ सरकार से जुड़ेंगे।
बीजेपी के लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी आज तीसरी बार प्रधानमंत्री की शपथ ले रहें हैं।
बहुमत से 32 सीट पिछड़ने के बाद एनडीए दलों की सांझेदारी से नई सरकार बन रही
है। 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए दलों ने अपने वोट साधने के लिए अलग चुनावी
घोषणा पत्र बनाये हैं।
अग्निवीर योजना से लेकर मुस्लिम पंथ को आरक्षण और जातीय जनगणना के वादे
एनडीए सरकार के लिए खासी चुनौती रहने वाले हैं।
18 वीं लोकसभा में स्पीकर पद पर कब्जे से नई सरकार में दलों की हिस्सेदारी स्पष्ट
होने वाली है।
मोदी और अमित शाह प्रचंड बहुमत की सरकार चलाने के आदि हैं। पिछली दो सरकार
में बीजेपी ने विपक्ष और साथी दलों को हासिये पर रखा है।
बीजेपी को समर्थन करने वाले दलों की आशंका अपने भविष्य को लेकर भी रहने
वाली है। बीजेपी के सबसे पुराने साथी अकाली दल , पंजाब और शिव सेना , महाराष्ट्र
में अपने बुरे दौर में हैं और बीजेपी से दूरी बनाये हैं।
मोदी सरकार के पिछले दौर में अन्य नेताओं को प्रचार और विस्तार का मौका नहीं मिला।
बीजेपी अपने एजेंडे को दस साल तक पोषित करती रही लेकिन ये पालिसी अन्य दलों
की राजनीति से काफी अलग हैं।
बीजेपी ने दक्षिण भारत में अपना विस्तार जरूर कर लिया है लेकिन अब दक्षिण भारत की
तेलुगु देशम पार्टी के बिना सरकार चलाना मुश्किल साबित हो रहा है।
बिहार में जेडयू और अन्य साथी दलों के बीच छतीस का आंकड़ा है।
बीजेपी इस चुनाव में 370 सीट जीतने का लक्ष्य लेकर निकली थी और 240 सीटों पर
सिमट गई। एनडीए के साथ चार सौ पार का नारा भी इस चुनाव में परवान नहीं चढ़
पाया है। बीजेपी ने अपनी पूरी शक्ति से चुनाव लड़ा और इंडिया गठबंधन गिने चुने
साधनों के साथ मैदान में उतरा था।
सत्ता विरोधी लहर ने बीजेपी को बहुमत के आंकड़े 272 तक नहीं पहुँचने दिया और
2024 में मोदी नेतृत्व को पहली बड़ी हार देखनी पड़ी है।
पदचिह्न टाइम्स।