चार धाम यात्रा से गदगद उड़ीसा यात्री बोले – देवभूमि की निंदा कैसे करें !
श्री बदरीनाथ धाम में हजारों तीर्थयात्री रोजाना पूजा -अर्चना दर्शन लाभ से पुण्य प्राप्ति में जुटे।

चार धाम यात्रा से गदगद उड़ीसा यात्री बोले – देवभूमि की निंदा कैसे करें !
श्री बदरीनाथ धाम में हजारों तीर्थयात्री रोजाना पूजा -अर्चना दर्शन लाभ से पुण्य प्राप्ति में जुटे।
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस साल नए परवान तय कर रही है – समय रहते जनप्रतिनिधियों ने हरिद्वार – ऋषिकेश में रोकी जा रही यात्रा को आगे बढ़ाने में हस्तक्षेप किया।
अब देहरादून से श्री बदरीनाथ धाम पहुंचने में 10 -11 घंटे का समय लग रहा है। आल वेदर रोड़ की सुविधा और यात्रा रजिस्ट्रेशन को विभिन्न जनपदों में शुरू करने से यात्रियों को सीधा लाभ मिल रहा है।
बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने हजारों तीर्थयात्रियों को समायोजित करने के लिए दर्शन के समय में बढ़ोतरी की है।
उत्तराखंड मित्र पुलिस के जवान व अधिकारी तीर्थयात्रियों के लिए मददगार बन रहे हैं।
श्री बदरीनाथ धाम में अलकनंदा तट के किनारे विशेष पूजा और पिंड दान में जुटे सैकड़ों यात्री तीर्थ के महात्मय को बढ़ा रहे हैं।
वरिष्ठ पंडा विनोद कोटियाल चाहते हैं कि पूजा अर्चना हेतु अलकनंदा तट पर घाटों का विस्तार किया जाए।
श्री बदरीनाथ के नव निर्माण में पंडा समाज की भूमिका और सुझाव को अधिकारी अनसुना न करें।
श्री बदरीनाथ धाम की भव्यता के लिए सब की हामी है। सैकड़ो साल पुराने धाम के अध्यात्मिक भाव पर टूरिज्म हावी न हो – इस की जिम्मेदारी सरकार को निभानी है।
उड़ीसा से चारधाम यात्रा में आए रतिकांत दास ने बताया – चार धाम यात्रा का पुण्य प्राप्त करने के बाद परिवार गदगद है।
हम देवभूमि की निंदा कर के पाप के भागीदार नहीं हो सकते।
जगन्नाथ धाम में सरकार नए निर्माण से सभी यात्रियों को रहने के लिए बड़े हाल बनवा रही है। ताकि सभी यात्रियों को छत नसीब हो।
बेटे ने बताया कि दिल्ली से चलकर ऋषिकेश में रजिस्ट्रेशन और टूर ट्रिप कार्ड लेने में एक दिन लग गया।
पूरे चारधाम की यात्रा आनंददायक रही है और केदारनाथ धाम में डाक्टर और दवाई पाकर मुझे बड़ी राहत मिली है।
श्रीबदरीनाथ धाम में युवा पंडित ने कहा – श्री केदारनाथ धाम की जबर्दस्त मार्केटिंग हुई है और अब चार धाम यात्रा को रजिस्ट्रेशन के नाम पर नहीं रोका जाना चाहिए।
अन्यथा यह संदेश जायेगा कि धामी सरकार यात्रियों को सुविधा देने में नाकाम है।
सड़क मार्ग पर सुरक्षा, खानपान, रहना और दवा की व्यवस्था को श्रेष्ठ बनाने में अधिकारियों को पहल करनी है। चार धाम यात्रा उत्तराखंड के लिए नई बात नहीं है और बरसात के दिनों में यात्रियों की संख्या कम हो जायेगी।
चार धाम यात्रा का आर्थिक लाभ हैली कंपनियों की जगह स्थानीय लोगों को अधिक मिलना चाहिए।
— भूपत सिंह बिष्ट