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14 नवम्बर बाल दिवस: नेहरू युग और विरासत का कालचक्र !

आजादी से पहले और स्वतंत्रता के बाद तमाम चुनौतियों को युग पुरूष नेहरू ने झेला और समाधान दिए।

14 नवम्बर बाल दिवस: नेहरू युग और विरासत का कालचक्र !
 आजादी से पहले और स्वतंत्रता के बाद भारत की तमाम चुनौतियों को युग पुरूष नेहरू ने झेला और समाधान दिए।
FIRST PRIME MINISTER CHACHA JAWAHAR LAL NEHRU
भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इलाहाबाद के प्रख्यात बैरिस्टर मोती लाल नेहरू के घर पर 14 नवंबर 1889 को पैदा हुए।
इंग्लैंड से बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी करके लौटे जवाहर लाल आराम से ठाट बाट की ज़िदगी बसर कर सकते थे लेकिन उच्च शिक्षा ने उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा दी।
महात्मा गांधी के शिष्य बने जवाहर लाल नेहरू ने आजादी की जंग में 9 बार में 9 साल अंग्रेजों की जेल में सजा काटी है। 1916 में कमला कौल से विवाह हुआ और 1917 में प्रियदर्शिनी इंदिरा बेटी का जन्म हुआ।
विश्व युद्ध में भारतीयों को झौंकने पर जवाहर लाल नेहरू ने विरोध किया और जेल की सजा काटी। 1946 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ संयुक्त सरकार बनायी।
1945 में ब्रिटीश सरकार ने भारत को आजाद करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था और मुस्लमानों के लिए अलग चुनावी क्षेत्र बनाये गए। जहां जिन्ना की मुलिम लीग के प्रत्याशियों ने कांग्रेसियों को हराया और पाकिस्तान निर्माण की बात परवान चढ़ गयी।
पंडित जवाहर लाल नेहरू का पहला प्रधानमंत्री कार्यकाल 2 सितंबर 1946 से 15 अगस्त 1947 तक का है।
इस दौरान भारत ब्रिटीश सम्राट जार्ज के आधीन था।
दूसरे दौर 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक की अंतरिम सरकार का है। इस दौरान भारत का संविधान बनाया जा रहा था लेकिन ब्रिटीश राज के प्रतिनिधि गवर्नर जनरल लार्ड मांउटबेटन और फिर चक्रवर्ती राजगोपालचारी रहे।
26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया और ब्रिटीश सरकार की छाया से मुक्ति मिल गई।
लोकसभा सांसद के रूप में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपना प्रधानमंत्री कार्यकाल 17 अप्रैल 1952 से 27 मई 1964 तक निभाया है। पंडित नेहरू लगभग 16 साल भारत के प्रधानमंत्री पद पर रहे हैं।
संसदीय लोकतंत्र, धर्म निरपेक्षता, विज्ञान और प्रोद्योगिकी का आधार मजबूत करने के लिए नेहरू जी के योगदान को भूलाया नहीं जा सकता है।
पंडित जवाहर लाल नेहरू एक जाने माने लेखक के रूप में भी विश्व में सराहे जाते हैं। पिता के बेटी के नाम खत, ऐन ओटो बायोग्राफी और डिस्कवरी आफ इंडिया विश्व की सभी भाषाओं में अंग्रेजी से अनुदित की गई हैं।
आजादी के बाद नए देश को संभालने में तमाम चुनौतियों का सामना पंडित नेहरू को करना पड़ा। भारत की भूमिका को विदेशों में स्थापित करने और नए विकास के कीर्तिमान गढ़ने के लिए नेहरू के सक्रिय योगदान को भूलाया नहीं जा सकता है।
1962 में पंचशील समझौते के बावजूद चीन ने भारत में धोखे से हमला कर दिया। तिब्बत की सीमा का विस्तार भारत के भीतर रोकने के लिए हमारे हिमालयी राज्यों को अक्टूबर – नवंबर 1962 में युद्ध की विभीषिका झेलनी पड़ी थी।
चीन युद्ध के बाद भारत को सीमाओं पर और मजबूती से खड़ा होना था। चीन विस्तारवाद के खिलाफ विश्व की सभी शक्तियों का सहयोग एकत्रित करने के लिए कूटनीति का सहारा लिया गया।
बच्चों के प्रिय चाचा नेहरू के जन्म दिवस 14 नवंबर को बालदिवस के नाम से मनाने की परंपरा चली आ रही है।
74 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से 27 मई 1964 को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू स्वर्ग सिधार गए।
– भूपत सिह बिष्ट

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