स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने निर्भीकता से चीन और पाकिस्तान को सबक सीखाया !
1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े करके बंगलादेश बनाया और 1952 से पिता नेहरू जी के साथ चीन सरहद पर गई।

स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने निर्भीकता से चीन और पाकिस्तान को सबक सीखाया !
1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े करके बंगलादेश बनाया और 1952 से पिता नेहरू जी के साथ चीन सरहद पर गई।
भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी का 105 वाँ जन्मदिन कांग्रेस ने महिला शक्ति दिवस के रूप में मनाया।
प्रियदर्शिनी इंदिरा का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में पंडित जवाहर लाल नेहरू की इकलौती बेटी के रूप में हुआ था।
इलाहाबाद के प्रतिष्ठित बैरिस्टर मोती लाल नेहरू की पोती प्रियदर्शिनी इंदिरा का लालन पोषण उच्चतम स्तर का रहा।
पूरा परिवार कांग्रेस के स्वतंत्रता आंदोलन का भागीदार रहा और आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू
देश के पहले प्रधानमंत्री बने।
कांग्रेस नेत्री के रूप चीन की सरहद चुशूल, लद्दाख का 1952 से लगातार प्रधानमंत्री नेहरू के साथ दौरा किया।
चीन के साथ सामरिक और कूटनीतिक रिश्तों की सच्चाई को समझा।
चीन के खिलाफ विश्व में कूटनीतिक अभियान चलाने में भी इंदिरा जी को काफी बढ़त मिली है।
रूस, अमेरिका और ब्रिटेन जैसी विश्व शक्तियों ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व को सराहा है।
सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए हिमालयी विषम परिस्थितियों को भी समझा।
दिसंबर 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में सेना भेजने के साहसिक निर्णय लेकर सदा के लिए पाकिस्तान के दो टुकड़े किए।
पाकिस्तान के खिलाफ भारत की मजबूती के लिए इंदिरा गांधी लौह महिला शक्ति बनी।
पंडित नेहरू की मृत्यु 27 मई 1964 के बाद लाल बहादुर शास्त्री देश के 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री बने।
ताशकंद समझौते के तुरंत बाद अचानक 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री भी स्वर्ग सिधार गए।
फिर श्रीमती इंदिरा गांधी 1966 से 1977 तक लगातार तीन बार और 1980 से 1984 तक चौथी बार हत्या होने तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।
निर्भीक इंदिरा गांधी के बाद अभी तक भारत के राजनीतिक फलक में दूसरी सशक्त महिला नेता का
उदय होना बाकि है।
— भूपत सिंह बिष्ट