कार्बेट नैशनल पार्क में ढिकाला रेंज का जलवा !
देश में एक मात्र आंशिक कोर एरिया जहां पर्यटक पिछले सौ साल से पहुंच रहे।

कार्बेट नैशनल पार्क में ढिकाला रेंज का जलवा !
देश में एक मात्र आंशिक कोर एरिया जहां पर्यटक पिछले सौ साल से पहुंच रहे।

ढिकाला रेंज में घास के मैदान चौड़ कहलाते हैं।
इन चौड़ में छोटी और ऊंची सभी प्रकार की अनेक प्रजातियों की घास मिलती हैं।
ये घास हिरन की विभिन्न प्रजातियां चीतल, सांभर, बार्किंग डियर, हाथी, जंगली सूअर
शौक से खाते नजर आते हैं।
बाघ के लिए ये चौड़ दिन में आराम करने और शिकार के काम भी आता है।
कार्बट पार्क में इंडियन टाइगर – भारतीय बाघ का स्वाभाविक निवास है।

बाघ के शरीर में धारियां पायी जाती हैं और दो बाघों के बीच धारियों के पैटर्न एक से नहीं होते हैं।
दूसरी ओर बाघ जैसा दिखने वाला गुलदार और तैंदुआ शरीर में धारियों की जगह धब्बों से पहचाना जाता है।
सामान्यता तैंदुआ और गुलदार हमेशा बाघ से दूरी बनाकर अपना बचाव करते हैं।
बाघ की पहचान उस के पगमार्क पैरों की छाप से की जाती है। पगमार्क से बाघ का लिंग,
आयु और उम्र का पता वन्य प्राणी विशेषज्ञ कर लेते हैं।
आजकल बाघ के रास्ते में थर्मल कैमरे लगाकर फोटोग्राफी से भी बाघों का बायोडाटा तैयार किया जाता है।
भारत में बाघों का बचाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण बनाया गया है और हर चार साल में बाघों की गिनती की जाती है।
ढिकाला रेंज में हमें पहले दिन शाम की सफारी में बाघ के दर्शन हो गए।
जिप्सी में सवार हर पर्यटक की दिली चाह बाघ से मुलाकात और एक अदद फोटो खींचने की रहती है।
ड्राइवर और गाईड बार्किंग डियर और लंगूर की आवाज से बाघ की उपस्थिति और हलचल को भांपते हैं।
चौड़ के किनारे – किनारे कच्ची सड़क के नाम ठंडी सड़क, लिंक रोड़, शेरभौजी, आदि हैं और
सफारी की जिप्सियां बाघ की काल आने पर दमसाधे लंबा इंतजार करते हैं।
बाघ के दर्शन भले आम न हो लेकिन हाथियों के झुंड, जंगली सूअर, नाना प्रकार के बंदर, लंगूर,
हिरन के झुंड के झुंड और नाना प्रकार के पक्षी कलरव करते मिल जाते हैं।
जंगल सफारी में गाड़ी से नीचे उतरना, शोर करना और जंगली जानवरों पर कैमरे की
फ्लैश चमकाना मना है।
सफारी के दौरान शाम को पांच बजे तक और सुबह सात बजे से दस बजे तक ही ढिकाला रेंज
के निर्धारित स्थानों तक जिप्सी से पहुंचा जा सकता है।
ढिकाला वन विश्राम गृह से राम गंगा बैराज का दृश्य बेहतरीन हैं। राम गंगा की धारा को
अस्थायी पुल से पारकर मगर और घड़ियाल देखे जा सकते हैं।
बैराज के दूसरे छोर से ढिकाला विश्रामगृह के सुंदर दृश्य हैं।
भाग दो …।
— भूपत सिंह बिष्ट