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ऑलवेदर रोड नाम सिर्फ बोलने में  ही अच्छा है !

विकास की पहली शर्त ही आबाद कृषि भूमि का अधिग्रहण तो नहीं ?

 

ऑलवेदर रोड नाम सिर्फ बोलने में  ही अच्छा है !
विकास की पहली शर्त ही आबाद कृषि भूमि का अधिग्रहण तो नहीं ?

डबल इंजन सरकार के जुमले ऑलवेदर रोड ने इस साल की बारिश में

बेहद निराश किया है।

डबरकोट में यमुनोत्री राजमार्ग, धरासू और तीन अन्य जगहों पर

गंगोत्री राजमार्ग, शिवपुरी से लामबगड़ तक कमेडा, छिनका, विरही, पागल नाला

और भी कई जगहों पर बदरीनाथ राजमार्ग पतली हालत में है।

 

केदारनाथ राजमार्ग भी अगस्तमुनि, खुमेरा, मैखंडा, रामपुर तथा कुछेक

अन्य जगहों पर आल वेदर रोड़ जवाब दे चुका।
फिर किस बात का ऑलवेदर रोड? इस सवाल का जवाब सड़कों के लिए

नामकरण देने वाले ही बता सकते हैं।

उल्लेखनीय है – वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव से पूर्व देहरादून में ही गाजे बाजे

के साथ ऑलवेदर रोड की घोषणा हुई थी।
तब राज्य में कांग्रेस सरकार हरदा – हरीश रावत की थी लेकिन यह आयोजन

भाजपा की सत्ता में वापसी के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

एनिमेशन वाले आल वेदर रोड़ पर दौड़ती आभासी गाड़ियां

देश – विदेश में लाखों मोबाइल का डाटा खा गई।
निसंदेह चारधाम यात्रा को सुगम बनाने की दृष्टि से योजना काफी हद तक महत्वपूर्ण है ।

अब जिस तरह से पहाड़ दरक रहे हैं – उसी अनुपात में लोग भी सिसक रहे हैं।
खेत खलिहान कुछ ऑलवेदर रोड की भेंट चढ़े तो कुछ रेल लाइन की।
जिस मलेथा को बलिदान भूमि मानते थे, खेलों – मेलों का मलेथा बदरंग है।

वहां अब ऐसा मंजर है, उसे देख कर विकास के प्रति वितृष्णा का भाव उपजता है।

विकास की पहली शर्त ही आबाद कृषि भूमि का अधिग्रहण रह गया है।

जंगल, रौखड़ या अनुपयुक्त भूमि पर ऐसे काम नहीं होते।
सरकारी भवन के लिए भी खेती की ही जमीन चाहिए।

DINESH SHASTRI

विषयांतर रोककर अगर बात ऑलवेदर रोड की ही करें तो तीर्थ यात्रियों के लिए

बेशक यात्रा का समय कम हो गया है।
अच्छी चौड़ी सड़क पर सरपट वाहन चलाने का आनंद आ रहा हो,

किंतु इसकी कीमत स्थानीय लोग ही चुका रहे हैं।

आलवेदर रोड का अर्थ – आम आदमी यही समझता है कि हर मौसम में आरामदेह सड़क !

लेकिन मौजूदा हालात इस जुमले की पुष्टि नहीं कर पा रहे।

अरबों की लागत से बनी सड़क एक मानसून नहीं टाप सकी। बाकी अगर कोई और भी

अर्थ होता हो तो नेता बता सकते हैं।

सड़कों के साथ बरसात पुलों पर भी काल बनकर टूट रही है।

कोटद्वारवासी वीआईपी जनप्रतिनिधियों को जीताने के बावजूद स्थायी नगर की

बसावट के लिए तरस रहे हैं।
देहरादून – सहारनपुर मुख्य मार्ग भी मोहंड के नीचे कई स्थानों पर दरकने लगा है।
दावा है – नई एलिवेटिड रोड़ बनते ही दूनवासी ढाई घंटे में दिल्ली दस्तक देंगे।

फिलहाल बरसाती नदी में खड़े पिलर परीक्षा रत हैं।
— दिनेश शास्त्री सेमवाल, वरिष्ठ पत्रकार।

 

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