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दुनिया की सभ्यता और गांवों की परिकल्पना पानी के बिना संभव नहीं है – डॉ० अनिल जोशी !

जल और प्रदूषण का संकट दुनिया में एक बड़ी चुनौती - विज्ञान को और सार्थक भूमिका निभानी है।

दुनिया की सारी सभ्यता और गांवों की परिकल्पना पानी के बिना संभव नहीं है – डॉ० अनिल जोशी !

जल और प्रदूषण का संकट दुनिया में एक बड़ी चुनौती – विज्ञान को और सार्थक भूमिका निभानी है।

जल और प्राणवायु का संकट पूरी दुनिया में एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है – हाईफीड संस्थान की कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए पद्म भूषण डा० अनिल जोशी ने कहा – युवा पीढ़ी को जल के महत्व तथा उसके सदुपयोग हेतु आमजन को जागरूक करना होगा ।

डा० जोशी ने बताया – पानी की उपलब्धता ने ही गांवों की परिकल्पना स्थापित की है । दुनिया की सारी सभ्यता संस्कृति का निर्माण जल धाराओं के इर्द गिर्द हुआ है।

शहरों की बढ़ती आबादी ने पानी की खपत बढ़ा दी हैं | नदियों को जोड़ने, नहरों के निर्माण कर पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है |

गांव के लोग पानी के महत्व को समझते हैं और पानी को बचाने व उसके संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं।

शहरों में पानी के प्रति असंवेदनशीलता, पानी के दुरुपयोग से भूजल का स्तर लगातार नीचे की ओर जा रहा है और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की प्रक्रिया तेजी से बढ़ी है।

विज्ञान ने संसाधन दिये, कई खोजें की मगर संरक्षण के सवाल पर बहुत ज्यादा काम नहीं हो पाया है।

अब लोक और विज्ञान के बीच उचित समन्वयन की जरूरत आ पड़ी है। इसीलिए जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रमों की आवश्यकता महसूस हुई है।

इस अवसर पर हाईफीड संस्थान के निदेशक डा० कमल बहुगुणा ने बताया – इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कालसी विकाससखंड के 67 ग्रामप्रधानों तथा ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्य भाग ले रहे हैं।

डॉ ० बहुगुणा ने बताया कि अभी तक के०आर०सी० हाईफ़ीड द्वारा देहरादून, टिहरी व उत्तरकाशी जनपदो के 12 विकासखण्डों में योजना चल रही है।
पदचिह्न टाइम्स।

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