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मोदी सरकार ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार के पर कतर दिए !

दिल्ली सर्विस कानून बनने से दिल्ली सरकार अब उप राज्यपाल के आधीन निर्णय लेगी ।

मोदी सरकार ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार के पर कतर दिए !
दिल्ली सर्विस कानून बनने से दिल्ली सरकार अब उप राज्यपाल के आधीन निर्णय लेगी ।

संसद में दिल्ली सर्विस कानून पास होने के बाद अरविंद केजरीवाल और

बीजेपी के बीच खटास और बढ़ गई है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने रात्रि प्रसारण में मोदी सरकार पर

आरोप लगाया – आजादी के 75 वें साल में दिल्ली के मतदाताओं को गुलाम

व असहाय बना दिया है।

ये मेरे साथ कंपटीशन नहीं कर पा रहे हैं और मुझे रोकने के लिए कानून बना रहे हैं।

अब लोग वोट देकर अपनी सरकार तो चुनेंगे लेकिन उस सरकार को

काम करने की आजादी नहीं है।
एक बार फिर सरकार ने 1935 की अंग्रेज सरकार की तर्ज वाला

खोखला गवर्नमेंट आफ इंडिया जैसा  एक्ट पास किया है।
जनता के वोट से बनायी गई सरकार और विधानसभा अब उप – राज्यपाल के

आधीन आ गई है।

गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बताया – केंद्रशासित दिल्ली की विधानसभा

सीमित अधिकार वाली है। सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए

इस कानून को बनाया जा रहा है।
आप पार्टी की दिल्ली सरकार अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर झगड़ालू प्रवृत्ति से ग्रस्त है।
देश की राजधानी में संसद, सुप्रीम कोर्ट, विदेशी दूतावास, राष्ट्रीय संस्थानों के

सुचारू कामकाज के लिए दिल्ली सर्विस बिल की आवश्यकता है।

दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ने से पहले अपने सीमित

अधिकारों का ज्ञान रहे।

राज्यसभा में दिल्ली सर्विस बिल पास करते हुए एनडीए और इंडिया गठबंधन

के बीच गर्मागरम बहस हुई।

कांग्रेसी सांसद और वरिष्ठ वकील मनु सिंघवी ने स्पष्ट किया – भले ही

बीजेपी इस बिल को पास करा ले लेकिन विधानसभा और चुनी हुई सरकार को

उप राज्यपाल के आधीन नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट तीन बार वोट से चुनी गई सरकार के प्रति अधिकारियों की जिम्मेदारी

तय कर चुकी है। अब नया कानून भी संविधान पीठ के आगे नहीं टिक पायेगा।

बीजेपी के अधिकांश सांसदों ने अरविंद केजरीवाल और आप पार्टी को

अपने निशाने पर रखा।

आम आदमी पार्टी के युवा सांसद राघव चड्डा ने बिल का विरोध करते हुए

याद दिलाया – आप पार्टी अब राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी है और दिल्ली में बीजेपी को

तीन बार लगातार हराया है।
दिल्ली नागरिकों को पूर्ण राज्य देने का अपना वादा पूरा करने की जगह बीजेपी

अपने पूर्व पोलिटिकल स्टैंड से हट रही है।
पिछले दो विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मात्र तीन व आठ विधायक जीत पाये हैं।

दिल्ली नगर निगम भी बीजेपी हारी है।
पचीस सालों में छह बार दिल्ली विधानसभा चुनाव बीजेपी हारी है और बैकडोर से

राजधानी दिल्ली पर राज करना चाहती है।
पदचिह्न टाइम्स।

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