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दून पुस्तकालय एवम् शोध केंद्र ने दयानंद अनंत को याद किया !

प्रगतिशील वामपंथी साहित्यकार दयानंद अनंत के रचना संसार पर पंकज बिष्ट और संजय कोठियाल ने वक्तव्य दिया।

दून पुस्तकालय एवम् शोध केंद्र ने दयानंद अनंत को याद किया !

प्रगतिशील वामपंथी साहित्यकार दयानंद अनंत के रचना संसार पर पंकज बिष्ट और संजय कोठियाल ने वक्तव्य दिया।

वामपंथी साहित्याकार दयानंद अनंत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर राजपुर रोड़ होटल के सभागार में प्रभावी आयोजन हुआ।
देहरादून के रंगकर्मी विजय गौड़ ने अपनी एकल प्रस्तुति में दयानंद अनंत की कहानी कनाट सर्कस के कौवे का भावपूर्ण मंचन किया।

दून पुस्तकालय एवम् शोध केंद्र के तत्वाधान में साहित्यिक आयोजन में प्रबुद्ध महिलाओं और साहित्य प्रेमियों ने उपस्थिति दर्ज करायी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और दयानंद अनंत के घनिष्ट मित्र साहित्यकार और समयांतर के संपादक पंकज बिष्ट ने आयोजन को भवव्यता प्रदान की।
हिंदी के प्रख्यात कथाकार और उपन्यासकार पंकज बिष्ट ने अपने निजी अनुभव सांझा किए।

दयानंद अनंंत समाज के लिए अर्पित व्यक्तित्व रहे हैं। उच्च शिक्षित परिवार में एक भाई आईएएस, दूसरा मिलेट्री आफिसर,बहन भारतीय रेलवे के कंप्यूटरीकरण प्रोजेक्ट का हिस्सा रही।

पति के वियोग में भी मां ने बच्चों को बेहतर शिक्षा दी।  दयानंद नौकरी के चक्कर में नहीं पड़े और वामपंथ से जुड़े।
कामरेड डांगे के करीबी रहे दयानंद ने कुछ समय तक रूसी दूतावास में सूचना विभाग में काम किया।

दिल्ली में एक घर नहीं जोड़ पाये और अंतिम समय तक पहाड़ में रहे।  पत्रकारिता में सक्रिय रहकर पर्वतीय टाइम्स का दिल्ली से प्रकाशन किया।

शराब माफिया के खिलाफ आंदोलन चलाया और घातक हमले के शिकार हुऐ।

दयानंद ने दो कहानी संग्रह , दो नाटक, दो उपन्यास और कई टेली सीरियल लिखे हैं।
गुइया गले न गले, चुंगी कहानियां उनकी बाल मन से समाज की अभिव्यक्ति करने वाली अप्रतिम रचनायें हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष पंत ने की।

युगवाणी के संपादक संजय कोठियाल ने दयानंद अनंत की पत्रकारिता से जुड़े अपने संस्मरण साझा किये।

रंगकर्मी विजय गौड़ ने अनंत की कहानी कनाट सर्कस के कौवे पर अपनी भाव पूर्ण एकल नाट्य प्रस्तुति दी।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध लेखक एवं साहित्यकार दयानंद अनंत का जन्म 14 जनवरी 1929 को नैनीताल में हुआ था। दयानंद अनंत ने कई लघु कथाएं, कहानियां, उपन्यास लिखने के अलावा कुछ टेलीविजन नाटकों की पटकथा भी लिखी।

वे एक कुशल संपादक और सामाजिक चिंतक भी थे।

दयानंद अनंत राम प्रसाद घिल्डियाल पहाड़ी फाउंडेशन, उत्तराखंड संस्कृति साहित्य एवं कला परिषद्, पहाड़ रजत सम्मान, उमेश डोभाल स्मृति सम्मान नंदा देवी महोत्सव सम्मान तथा मोहन उप्रेती सम्मान से भी सम्मानित हुए हैं। भवाली में 13 अक्टूबर 2016 को 88 साल की आयु में उनका निधन हुआ।

उनकी कहानी संग्रह चूहेदानी, गुइया गले न गले व कनाट सर्कस के कोए तथा उपन्यास कामरेड, कौकर नाग पर कुहासा निशांत और फातिमा मुख्य साहित्यिक कृतियां है।

कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार राजेश सकलानी ने किया।

कार्यक्रम के अन्त में प्रोग्राम एसोसिएट, चन्द्रशेखर तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

— भूपत सिंह बिष्ट

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