विश्व के 75 प्रतिशत 3682 बाघ अब भारत के वनों में सुरक्षित !
मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, महाराष्ट्र में टाइगर बढ़े लेकिन अरूणाचल, उड़ीसा, तेलांगना, छतीसगढ़ और झारखंड में घटे।

विश्व के 75 प्रतिशत 3682 बाघ भारत के वनों में सुरक्षित !
मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, महाराष्ट्र में टाइगर बढ़े लेकिन अरूणाचल, उड़ीसा, तेलांगना,
छतीसगढ़ और झारखंड में घटे।
इंटरनेशनल टाइगर डे – 29 जुलाई को भारत में बाघों की संख्या 3682 घोषित हुई है।
वैसे बाघों की गणना हर चार साल में की जाती है और ये आंकड़े वर्ष 2022 के हैं।
वर्ष 2018 में बाघों की अधिकारिक संख्या 2967 बतायी गयी थी। वनाग्नि, अवैध कटान और
अन्य पर्यावरण कारणों से हर प्रदेश का वन क्षेत्र सिकुड़ा है।
फिर भी बाघों की संख्या में बढ़ोतरी सुखद खबर है। 50 साल पहले भारत ने अपने
राष्ट्रीय जीव बाघ के लिए राष्ट्रीय बाघ परियोजना संयुक्त राष्ट्र संघ के सहयोग से प्रारंभ की।
अप्रैल 2023 में बाघ परियोजना ने अपने 50 साल पूरे कर लिए – तब
बाघों की संख्या 3167 आंकी गई।
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भारत में बाघों की निगरानी के लिए नेशनल टाइगर कंसर्वेशन अथारिटी,
नेशनल टाइगर प्रोजेक्ट और वाइल्ड लाइफ इंसटीटयूट तीन प्रमुख संस्था हैं।
बाघ अपनी धारियों के विशिष्ट पैटर्न, पग मार्क से अलग – अलग पहचान रखते हैं।
बाघ की गिनती में थर्मल कैमरे और मानव संसाधन का उपयोग किया जाता है।
हर चार साल बाद बाघ गणना के अभियान में गलती की संभावनायें हैं क्योंकि
प्रत्येक बाघ तक पहुंचना असंभव है।
बाघों की संभावना 3925 की गई थी लेकिन वाइल्ड लाइफ इंसटीटयूट ने
औसत संख्या 3682 को माना है।
भारत में बाघों की संख्या पूरे विश्व का 75 प्रतिशत है और प्राणियों की इस
नस्ल को बचाने के लिए दुनिया भर की निगाहें हैं।
वैज्ञानिकों का तर्क है कि दुर्लभ बाघ को बचाने के लिए आधुनिक रेडियो कालर
तकनीक का उपयोग किया जाना जरूरी है।
तब बाघों की संख्या का अनुमान और हकीकत का अंतर मिट जायेगा।
टाइगर के नए आंकड़ों में अरूणाचल प्रदेश में बाघ 29 से घटकर मात्र 09 रह गए हैं।
उड़ीसा में 28 से घटकर 20, तेलांगना में 26 से घटकर 21, छतीसगढ़ में 19 से घटकर 17
और झारखंड में बाघों की संख्या 5 से घटकर एक पर रह गई है।
भारत में सबसे ज्यादा बाघ मध्यप्रदेश में 785, कर्नाटक में 563,उत्तराखंड में 560 और
महाराष्ट्र में बाघों की संख्य् 444 बतायी गई है।
कार्बेट पार्क उत्तराखंड में बाघों की संख्या 260 बतायी गई है और 2018 में
यहां 231 बाघ थे। बाघों का यहां बढ़ता घनत्व अध्ययन का विषय है।
मिजोरम और नागालैंड अब बाघ शून्य हो गए हैं।
पश्चिम बंगाल में 2006 की गणना में 10 बाघ थे जो 2022 की बाघ गणना में मात्र 2 रह गए हैं।
– भूपत सिंह बिष्ट, स्वतंत्र पत्रकार