लेखक, व्यंग्यकार – कवि फारूक आफरीदी को वर्ष 2020 का राष्ट्रीय अणुव्रत लेखक सम्मान !
लेखक की शब्द शक्ति से अर्तात्मा का मूल भाव हजारों लोगों तक पहुंचता है।

लेखक, व्यंग्यकार – कवि फारूक आफरीदी को वर्ष 2020 का राष्ट्रीय अणुव्रत लेखक सम्मान !
अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने भीलवाड़ा में आयोजित एक समारोह में देश के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, कवि, पत्रकार एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी फारूक आफरीदी को साहित्यिक योगदान के लिए वर्ष-2020 का ‘‘राष्ट्रीय अणुव्रत लेखक पुरस्कार‘‘ प्रदान किया।
आचार्य श्री महाश्रमण जी ने लेखक आफरीदी को आशीर्वाद देते हुए कहा की लेखक की शब्द शक्ति से अर्तात्मा का मूल भाव हजारों लोगों तक पहुंचता है। लेखक में निर्भीकता से विचार व्यक्त करने का सामर्थ्य होता है। आशा है लेखक अणुव्रत के विचार को अधिक से अधिक अंकुरित करने का प्रयास करेंगे।
फारूक आफरीदी ने कहा कि वे इस पुरस्कार के लिए अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी और अणुव्रत लेखक मंच के कृतज्ञ हैं।
आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अणुव्रत को जीवन के हर क्षेत्र से जोड़कर इसे व्यापकता दी है। अणुव्रत आन्दोलन नैतिक मूल्यों का जीवन्त दस्तावेज है।
हर इंसान में इन गुणों का समावेश आवश्यक है। आज हम समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को भूलते जा रहे हैं। समाज में पाप, हिंसा और पाखण्ड का बोलबाला है। अणुव्रत इसका एक मात्र हल है।
अणुव्रत के सिद्धांत मनुष्य को श्रेष्ठता प्रदान करने के साथ हर बुराई से बचाते हैं। यह जीवन की आचार संहिता है ।देश में सभी धर्मों और विचारधाराओं का आदर-सम्मान है। सभी संस्कृतियों के समन्वय से भारत की संस्कृति को गंगा-जमुनी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी के अहिंसा आन्दोलन की भांति अणुव्रत आन्दोलन सदैव प्रासंगिक रहेगा। इस आन्दोलन से सभी को जुड़ना चाहिए चाहे वह किसी धर्म, सम्प्रदाय या विचार का क्यों न हो।
आफरीदी देश के जाने-माने साहित्यकार हैं और लेखन के क्षेत्र में निरन्तर सक्रिय हैं। ‘‘मीनमेख‘‘ एवं ‘‘बुद्धि का बफर स्टॉक‘‘ व्यंग्य कृतियां और काव्य कृति ‘‘शब्द कभी बांझ नहीं होते‘‘ प्रमुख हैं। इसके अलावा ‘‘कस्तूरबा और आधी दुनिया‘‘, राष्ट्रीय एकता पर ‘‘हम सब एक हैं‘‘ कहानी एवं ‘‘सूचना का अधिकार‘‘ जैसी कृतियों की रचना की है एवं उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों का सम्पादन किया है।
इससे पूर्व में यह सम्मान राजेद्र शंकर भट्ट, श्यामसिंह ‘शशि‘, नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम‘, मूलचंद सेठिया, आनन्द प्रकाश त्रिपाठी आदि लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकारों और विभूतियों को मिल चुका है।
प्रस्तुति — रजनीश त्रिवेदी।