
पहाड़ में लम्बी पदयात्रा करने वाला उत्तराखंडी नेता गांववासी जी नहीं रहे !
पूर्व भाजपा मंत्री मोहन सिंह रावत आरएसएस के प्रचारक और माँ झाली माली के अनन्य साधक रहे।
पौड़ी गढ़वाल के बड़े राजनेता मोहन सिंह रावत गांववासी का आज देहरादून के एक अस्पताल
में स्वर्गवास हो गया है।
गांववासी के नाम से विख्यात राजनेता मोहन सिंह रावत उत्तर प्रदेश विधानसभा में दो बार
भाजपा के विधायक रह चुके हैं।
अपनी पदयात्राओं से देशभर में घूमने वाले भारतीय जनता पार्टी के फ़क्कड़ नेता
अपने बिंदास स्वभाव के लिए भी जाने जाते हैं।
उत्तर प्रदेश के विधायक रहते हुए मोहन सिंह रावत उत्तराखंड की पहली अंतरिम सरकार
में कैबिनेट मंत्री बनाये गए।
चलो गांव की ओर मुहिम के प्रेरक गांववासी को पंचायती विभाग का मंत्रालय पहले
मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी ने दिया।
धार्मिक पूजापाठ और अध्यात्म में गहरा जुड़ने के बाद गांववासी जी ने चुनावी
राजनीति से किनारा कर लिया था।
अपनी मजबूत इच्छा शक्ति के चलते गांववासी जी ने हिमाचल से उत्तराखंड, गुजरात, सिक्किम,
उत्तरपूर्व,दक्षिण प्रदेशों और कैलाश मानसरोवर क्षेत्रों में लंबी और दुर्गम पदयात्रायें की हैं।
उनका आम जनमानस से सीधा और सरल संबंध हमेशा बना रहा।
बदरीनाथ धाम से तिब्बत सीमा पर स्थित देवताल सरोवर दुर्गम पदयात्रा की नींव रखने का
श्रेय भी मोहन सिंह रावत गांववासी जी को है।
अब तो पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद तीरथ सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस देवताल
को लेकर सक्रिय हुए हैं।
पौड़ी में रांसी स्थित क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर के समीप अपने निवास में माँ झाली माली का
भव्य मंदिर बनाकर नवरात्रों में कड़ा तप करने के लिए भी गांववासी जी जाने गए हैं।
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गांववासी जी बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय भाई जोशी जी को मदमहेश्वर केदार
की दुर्गम यात्रा करा चुके हैं।
गांववासी जी की बीजेपी की वरिष्ठ महिला नेता उमा भारती जी के साथ धार्मिक और सामाजिक
मसलों पर गहन चिंतन करते रहे हैं।
गांववासी जी देहरादून में संघ के प्रचारक रह चुके हैं। गढ़वाल मंडल में राम जन्म भूमि के
सक्रिय कार्यकर्ता बनने के बाद मोहन सिंह रावत उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक चुने गए
और जनप्रतिनिधि बनकर अनगिनित लोगों के राजकाज निपटाने में सहायक बने हैं।
अपनी सरकार के खिलाफ नाराजगी शांत करने में गांववासी जी हमेशा सक्रिय भूमिका रहते थे।
पौड़ी निवासी गाँव वासी जी के सहयोगी रहे प्रशांत नेगी ने अपने शोक सन्देश में कहा –
परम आदरणीय गाँव वासी जी का आकस्मिक निधन पूरे उत्तराखंड के लिए बहुत दुखद है।
मैंने जनसंघ के ज़माने से उनके साथ कार्य किया है और इतना अच्छा संगठन कर्ता एवं नेता
आज तक नहीं देखा।
ईमानदार छवि, साधारण जीवन और निश्छल स्वाभाव, चरित्र वान,कमाल की सोच
और भविष्य दृष्टा – इतना सब आज के नेताओं मे नहीं मिल सकता।
मैंने आदरणीय गांव वासी जी से बहुत कुछ सीखा अध्यात्म, सामाजिक जीवन,
छात्र जीवन सभी जगह मार्ग दर्शन मिलाहै।
– भूपत सिंह बिष्ट