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19 नवंबर 1962- हीरोज आफ रिजांग ला परमवीर चक्र मेजर शैतान सिंह भाटी !

13 कुमांउ रेजिमेंट ने चीनी सेना को मुँह तोड़ जवाब देकर रचा था इतिहास, रिजांग - ला वार मैमोरियल सुना रहा दास्तान।

19 नवंबर 1962- हीरोज आफ रिजांग ला परमवीर चक्र मेजर शैतान सिंह भाटी !

13 कुमांउ रेजिमेंट ने चीनी सेना को मुँह तोड़ जवाब देकर रचा था इतिहास, रिजांग – ला वार मैमोरियल सुना रहा दास्तान।

19 नवंबर 1962 को लद्दाख के चुशूल सेक्टर में 13 कुमांउ रेजिमेंट के 114 वीर जवानों ने

देश की रक्षा में अपना बलिदान दिया और अमर हो गए।

अक्टूबर 1962 में भारत और चीन के बीच तिब्बत सीमा पर तनातनी अरूणाचल से लेकर

लद्दाख में जम्मू – कश्मीर तक फैल चुकी थी।
चुशूल हवाई पट्टी और बार्डर की सुरक्षा के लिए लेह से 220 किमी दूर 16 हजार फीट की

बर्फीली सरहद पर 13 कुमांउ रेजिमेंट के 124 जाबांज तैनात किए गए थे।
इन का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह भाटी कर रहे थे।

19 नवंबर की सुबह चीन के सैकड़ों जवानों ने रिजांग ला सीमा पर हमला बोल दिया।
चीन की सेना हाईएल्टीटयूट तैनाती और आधुनिक हथियारों से लैस थी।

मेजर शैतान सिंह के जाबांज अपने सीमित साधनों और बड़े हौंसलों से चीन पर भारी साबित हुई।
” आखिरी गोली, आखिरी आदमी ” आर्डर का पालन करते हुए आर – पार की जंग में

मेजर शैतान सिंह सहित 13 कुमांउ रेजिमेंट के 114 जवान शहीद हुए।
दुश्मन चीन के तेरह सौ जवानों को 13 कुमांउ रेजिमेंट ने ढेर किया था।

पांच जवानों को चीनी सेना ने कैद किया और 6 घायल जवान ही अपनी बटालियन में लौट पाए।

रिजांग ला युद्ध में 96 शहीदों के बर्फ में जमे शव फरवरी 1963 में तीन माह बाद सेना ने बरामद किए।

ब्रिगेड कमांडर टीएन रैना, मेजर जीएन सिन्हा और तमाम रैंक ने पूरे फौजी सम्मान के साथ

शहीदों का अंतिम संस्कार किया।

अब यहां आम नागरिकों के लिए एक भव्य हाल आफ फेम – रिजांग ला वार मैमोरियल बनाया गया है।

इस अपूर्व वीरता के लिए 13 कुमांऊ को एक परमवीर चक्र, 6 वीर चक्र और चार सेना मैडल से

अलंककृत किया गया।
परमवीर चक्र मेजर शैतान सिंह भाटी, वीरचक्र सुबेदार हरिराम, वीरचक्र जैम सुरजा,

वीरचक्र नायक हुकम चंद, वीरचक्र गुलाब सिंह, वीरचक्र लासं नायक सिंह राम,

वीरचक्र सिपाही धर्मपाल सिंह दहिया और सैना मैडल हरफूल सिंह।
– भूपत सिंह बिष्ट

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