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चम्बा का ऐतिहासिक मिंजर मेला सदभावना का प्रतीक !

हिमाचल की आंचलिक संस्कृति में सांझी विरासत मिंजर मेला है सबका साथ ।

चम्बा का ऐतिहासिक मिंजर मेला खुशहाली तरक्की और सदभावना का प्रतीक !

हिमाचल की आंचलिक संस्कृति में सांझी विरासत मिंजर मेला है सबका साथ ।

 

मिंजर मुबारक मिंजर मेले का समापन हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के हाथों रविवार, 31 जुलाई को होना है।

खेलकूद व सास्कृतिक स्पर्धाओं के पुरस्कार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर वितरित करेंगे।

आठ दिन की सांस्कृतिक संध्या के बाद चम्बा लोक संस्कृति और परम्परा अनुरूप झांकियां, वाद्य यंत्र और कलाकारों का जुलूस प्रमुख मार्गों से गुजरेगा।

किसानों को धन धान्य से खुशहाली मिले तथा आम जनता को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा मिले – इस के लिए पंद्रह दिन तक देवी – देवताओं का आह्वान किया जाता है।

युवक और युवतियां एक पखवाड़े तक खेलकूद, सांस्कृतिक गीत, संगीत और नृत्यों में अपने उल्लास और उमंग को प्रकट करते हैं।

पहले मिंजर मेले में चौगान मैदान में शाम को फीचर फिल्म सूचना विभाग के सौजन्य से दिखायी जाती थी।

 


अब रोजाना सांस्कृतिक गीत – नृत्य के आयोजन में हिमाचल व पंजाब के जाने माने कलाकार शिरकत करते हैं।

बचपन के साथी ने एक लोकगीत की याद दिलाते हुए पूछा — क्या परदेश में हम अभी तक इस नगर और संस्कृति को याद करते हैं !

रावी नदी के किनारे बसे चम्बा नगर की छटा ही निराली है।  यह नगर मंदिरों का नगर कहलाता है।

श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, श्री नर सिंह मंदिर, श्री बंसी गोपाल मंदिर तो सब के अराध्य हैं।

सुनयना देवी का मंदिर आज भी प्रजा के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाली रानी की कथा कहता है — माँ सूई के नाम के मंदिर में पंद्रह दिनों का मेला सिर्फ महिलाओं के लिए इस नगर में आयोजित होता है।

चम्बा महिला सशक्तिकरण का सजीव उदाहरण हैं – रोजगार ने आत्म निर्भर महिलाओं का प्रतिशत समाज में बढ़ाया है।

माँ चामुण्डा देवी का मंदिर और उस से जुड़ा शिवालय सबकी पसंद हैं।

इन मंदिरों के आशीर्वाद, प्रसाद और मेलों ने हमारे जीवन को हमेशा समृद्ध किया है।

देव आनंद साहब ने अपनी हीरोइन प्रिया राजवंश के साथ 1977 में चम्बा नगर में अपनी फिल्म ” साहब बहादुर” को शूट किया है।
इस के अलावा सावन भादों से लेकर कई हिंदी फिल्मों का छायांकन इस शहर में हुआ है।

इस नगर के स्कूल – कालेज में पढ़कर छात्रों ने देश के सर्वोच्च संस्थानों में सेवा के अवसर पाये हैं।

त्रि भाषा फार्मूले के तहद सैकेंडरी शिक्षा तक पहले हिंदी, उर्दू व अंग्रेजी सीखायी जाती रही है।
— भूपत सिंह बिष्ट

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