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सौ साल खड़ा, सौ साल पड़ा और फिर सौ साल तक सड़ा !

कार्बेट नैशनल टाइगर रिजर्व की सदाबहार हरियाली में साल की महिमा सदियों से बरकरार।

सौ साल खड़ा, सौ साल पड़ा और फिर सौ साल तक सड़ा !

कार्बेट नैशनल टाइगर रिजर्व की सदाबहार हरियाली में साल की महिमा सदियों से बरकरार।

PICTURE – ASMITA BIST

कार्बेट पार्क में गाईड अक्सर साल जंगलों को लेकर एक मुहावरा सुनाते हैं

सौ साल खड़ा, सौ साल पड़ा  और फिर सौ साल तक सड़ा।

यानि साल के वृक्ष सालों तक अपने बहुमूल्य टिम्बर क्वालिटी के लिए जाने जाते हैं।
भारत में जंगलों को हरा भरा रखने में सदा बहार साल वृक्ष का बड़ा योगदान है।

कार्बेट ढिकाला रेंज में सफारी के दौरान आकाश से बिजली गिरने पर क्षति ग्रस्त पेड़ों में

एक 6 मीटर घेर वाले  साल के पेड़ को भी दिखाते हैं।

साल के ऊंचे वृक्ष शाकाहारी बलशाली हाथी और मांसाहारी बाघ दोनों के साथ खूब फबते हैं।

साल के घने जंगलों के बीच सुबह जब सूरज की किरणें भेदकर आती हैं तो रसायन विज्ञान

का “टिंडल इफेक्ट” भी साकार होता है।

प्रकाश किरणों के बीच सूक्ष्म कणों की हलचल और उर्जा का प्रवाह बना हुआ दिखता है।

कार्बेट पार्क उत्तराखंड हिमालय में अपार विवध वन संपदा का खजाना है।
खुश्बू और रंग देने वाले पौधे, झाड़ियां और वृक्षों का अंतर, जीवन में सहजीवी और परजीवी की

परिभाषा यहां उपलब्ध हैं।

पेड़ से हिरणों के लिए पत्ते गिराते बंदरों की मित्रता अबूझ पहेली है।
बंदर और हिरण आगाह कर देते हैं – सावधान, आसपास बाघ का खतरा है।

कार्बेट में कलरव करती सात बहन चिड़ियों का झुंड, एकल चिड़िया, जल पक्षी, प्रवासी पक्षी समेत

छह सौ प्रजातियां अभी 25 फीसदी पक्षी वर्ग का घर है।

कार्बेट पार्क वनस्पति विज्ञान को समझने के लिए प्रकृति की प्रयोगशाला है।

हमारे रोजमर्रा जीवन में बहुपयोगी आंवला, अमलतास, बेर, बाँस, शीसम और साल आदि के पेड़

जीने के लिए दवा, घर – गृहस्थी , उद्योग व फर्निचर की लकड़ी तथा मृत्यु में अंत्येष्टि संस्कार तक

हम वन – वनस्पति से जुड़े हैं।

भूमि और जल वनस्पति की विविधता की उपयोगिता, प्रबंधन और संरक्षण वन विभाग कार्बेट पार्क पिछले

दो सो साल से संभाले हुए है।

वन्य प्राणियों और वनस्पति के संरक्षण का दायित्व निभाने के लिए सैंचुरी, टाइगर रिजर्व, अभ्यारण्य,

पार्क, जू आदि बनाये गए हैं।
मानव दोहन और अतिक्रमण से बचाने के लिए जंगल को “कोर ( केंद्र स्थल) और बफर (केंद्र से बाहरी क्षेत्र)” में बांटा जाता है।
प्रकृति की जैव विविधता को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए कार्बेट पार्क के सभी छोटे

और बड़े वन कर्मचारी अपना योगदान दे रहे हैं।
( कार्बेट पार्क अंतिम कड़ी)
– भूपत सिंह बिष्ट

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