भारत दर्शन : लेह लदाख में बर्फीले पहाड़ रेगिस्तान और राफ्टिंग !
विदेशी टूरिस्टों को भगवान बुद्ध की शिक्षा और विरासत की तलाश लदाख ला रही है।

भारत की विविधता में लदाखी समाज की बहुरंगी छटा अब सब का मन मोह रही है।
लदाख में बर्फीले पहाड़ हैं, ठंडे रेगिस्तान हैं और तिब्बत से बहकर आ रही प्राचीन सिंधु (इंडस) नदी का इतिहास है।
कम आक्सीजन के बीच ट्रेकिंग, हिमालयी पठारों पर बाइक और कार ड्राइविंग जीवन के अनूठे अनुभव हैं।
लेह की नदियों में अब राफ्टिंग की धूम उठ रही है। उत्तर भारत के इस पर्यटक केंद्र में पूर्व, पश्चिम और दक्षिण भारत से हर उम्र के पर्यटकों का तांता लगा है।
विदेशी टूरिस्ट यहां भगवान बुद्ध की प्राचीन शिक्षा और आस्था के सुत्रों को तलाशने आते हैं।
तिब्बत पर चीन का कब्जा होने से भारत और तिब्बत के मध्य निर्बाध आना – जाना बंद है। अन्यथा प्राचीन व्यापारिक मार्ग पर युवाओं में साहसिक जोखिम उठाने के भरपूर अवसर हैं।
केंद्रशासित सीमांत लदाख प्रदेश का मुख्यालय लगभग ग्यारह हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित है।
बारिश कम होती है – मौसम में ठंड होने से पानी रूई की बौछार में बदल जाता है।
दिल्ली से एक घंटे की फ्लाइट पकड़कर भारत के सबसे ऊंचे हवाई अड्डे लेह में पहुंचा जा सकता है।
मनाली, हिमाचल प्रदेश से नैसर्गिक रोहतांग, केलांग, तांगला दर्रे पार कर लेह पहुंचते हैं।
श्रीनगर से चार सौ किमी दूर लेह पहुंचने में कश्मीर घाटी की सुंदरता बालताल, जोज़िला दर्रा, द्रास, कारगिल पारकर लेह का सुहाना सफर पूरा होता है।
तिब्बत की सीमा पर स्थित लदाख अपनी बौद्ध संस्कृति के लिए विश्व भर में विख्यात है।
भगवान बुद्ध ने मनोविज्ञान पर आधारित शिक्षा से हमारी जीवनधारा को समृद्ध किया है।
— भूपत सिंह बिष्ट