विश्व में सबसे ऊँचा बौद्ध शांति स्तूप लदाख लेह का प्रमुख आकर्षण !
भगवान बुद्ध की प्रतिमा और शिक्षा का प्रचार - प्रसार करता " नमो मयो हो रेंगे क्यो " लदाख का बौद्ध मंदिर।

विश्व में सबसे ऊँचा बौद्ध शांति स्तूप लदाख लेह का प्रमुख आकर्षण !
भगवान बुद्ध की प्रतिमा और शिक्षा का प्रचार – प्रसार करता ” नमो मयो हो रेंगे क्यो ” लदाख का बौद्ध मंदिर।
मार्च माह से लेह, लदाख में देश – विदेश के पर्यटकों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है।
नवंबर की बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और संपर्क मार्गों की बाधा के कारण लदाख में भारतीय सेना ही मुस्तैद रहती है।
पर्यटकों के लिए यात्रा सीजन बंद हो जाता है – दिल्ली से हवाई सेवा आरंभ होने के बाद तथा श्रीनगर – जोज़िला – द्रास – कारगिल – लेह मार्ग यात्रा के लिए खुलते ही साहसी पर्यटकों की भीड़ जुटने लगती है।
मनाली, हिमाचल प्रदेश से लेह का मार्ग भी आजकल अप्रैल से खुल जाता है।
लदाखी संस्कृति का मूल मंत्र शांति, भाईचारा और सदभावना का संदेश प्रसारित करने में शांति स्तूप की महति भूमिका है।
चांसपा हिल पर स्थापित भगवान बुद्ध का शांति स्तूप स्थापत्यकला का राष्ट्रीय उदाहरण है।
समुद्र तल से 3609 मीटर यानि 11841 फीट पर विश्व के सबसे ऊँचे बौद्ध स्तूप का श्रेय आज लदाख प्रदेश में है।
जापान के प्रमुख बौद्ध संप्रदाय निप्पोज़ेन मायोजी के परम पूज्य धार्मिक विद्वान निचीदातसू फूजी गुरू जी के आशीर्वाद से इस स्तूप का निर्माण संभव हो सका है।
8 अप्रैल 1983 को भूमि पूजन हुआ। इस अवसर पर लदाख के परम श्रद्धेय कुशोक वाकुला रिंपोछे, मंत्री पिंटू नोर्बू, लेह के डीसी सी फूनसोंग, बिग्रेडियर आर के गौड़, जापानी व अन्य गणमान्य अतिथि शरीक हुए।
14 वें दलाई लामा परम पूज्य तेंजिन ग्यातसो ने 25 अगस्त 1985 को शांति स्तूप की आधार शिला रखी।
25 अगस्त 1991 को भगवान बुद्ध शांति स्तूप का लोकार्पण परम पूज्य थिक्से रिंपोछे ने किया।
इस अवसर पर निप्पोज़ेन मायोजी संप्रदाय के जापानी अतिथि उपस्थित रहे – इस संप्रदाय ने विश्व के अनेक भागों में भगवान बुद्ध के शांति स्तूप निर्मित कराये हैं।
आज लदाख शांति स्तूप के दर्शन करने के लिए देश – विदेश के पर्यटक रोजाना जुटते हैं।
शांति स्तूप से लेह नगर के मनोरम दृश्य और सामने हिमालय की बर्फीली चोटियां सबको मोह लेती हैं।
भगवान बुद्ध का जीवन दर्शन समझने के लिए लेह का यह मंदिर अद्वितीय है।
– भूपत सिंह बिष्ट