दादा – पोते का भावपूर्ण रिश्ता और प्रकृति के साथ संघर्ष है – पाताल – ती शार्ट फिल्म !
रूद्रप्रयाग के युवाओं ने सीमित साधनों से 26 मिनट की लघु फिल्म में भोटिया समाज को अंतर - राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाया।

दादा – पोते का भावपूर्ण रिश्ता और प्रकृति के साथ संघर्ष है – पाताल – ती शार्ट फिल्म !
रूद्रप्रयाग के युवाओं ने सीमित साधनों से 26 मिनट की लघु फिल्म में भोटिया समाज को अंतर – राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाया।
गोवा में चल रहे 53वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल में उत्तराखण्ड की शार्ट हिंदी फिल्म पाताल-ती (पवित्र जल ) कल प्रदर्शित की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का शुभकामना संदेश देने के लिए उत्तराखण्ड फ़िल्म पैवेलियन में
विशेष प्रमुख सचिव सूचना अभिनव कुमार ने पाताल – ती टीम से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री धामी ने संदेश दिया है – उत्तराखंड के लिए विशेष गर्व की बात है। रुद्रप्रयाग के युवाओं प्रयास राष्ट्रीय एव अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है।
अभिनव कुमार ने कहा कि राज्य सरकार इन प्रयासों को हर संभव सहयोग एवं प्रोत्साहन देगी।
नई फ़िल्म नीति में अंतर्राष्ट्रीय समारोहों हेतु चयनित फ़िल्मों को अब प्रोत्साहन दिया जायेगा।
पाताल-ती 25 नवम्बर को फ़िल्म महोत्सव में दिखायी जानी है।
नई फिल्म नीति से राज्य के युवा फ़िल्म निर्माताओं को भरपूर सहयोग मिलेगा।
उत्तराखंड में जल्दी स्वस्थ और समृद्ध फ़िल्में बनाने का बाजार विकसित होना है।
पाताल – ती फिल्म के निर्माता-निर्देशक संतोष रावत ने बताया – हमने सीमित संसाधनों से इस शार्ट फ़िल्म का निर्माण किया है।
ये फ़िल्म दक्षिण कोरिया के बुसान व रूस के मास्को शहर में प्रदर्शित की जा चुकी है।
फ़िल्म उत्तराखंड की भोटिया जनजाति पर केंद्रित है और दादा-पोते के भावनात्मक रिश्ते को जाहिर करती है।
फिल्म 26 मिनट में पहाड़ के परिदृश्य में प्रकृति व मानव के संघर्ष को सामने लाती है।
- भूपत सिंह बिष्ट