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माँ के दम पर हम दुनिया को श्रेष्ठ बना सकते हैं – भगत सिंह कोश्यारी!

दून विश्वविद्यालय में  भारतीय महिला - सत्य आधारित दृष्टिकोण पर अन्तरतरष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

माँ के दम पर हम दुनिया को श्रेष्ठ बना सकते हैं – भगत सिंह कोश्यारी!

दून विश्वविद्यालय में  भारतीय महिला – सत्य आधारित दृष्टिकोण पर अन्तरतरष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

दून विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अन्तरतरष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा – अच्छी माँ ही हमें और दुनिया को भी श्रेष्ठ बना सकती है।

 भूमि मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूं… अथर्ववेद का यह श्लोक हमें अन्न देने वाली धरती माँ को धारिणीऔर माँ की संज्ञा देती है।
अतीत में हमारी श्रेष्ठता का पर्याय विदुषी मातायें रही हैं।

एक दौर में अंग्रेजी बोलने वाले श्रेष्ठ हो गए। आज स्थितियां बदली हैं ।
शिक्षा में छात्राओं की श्रेष्ठता प्रतिशत संकेत दे रहा है अगर समाज में महिला ज्ञानवान है तो समाज खुशहाल है।
एक संस्कारी माँ ही सभ्य और सफल समाज की कुंजी है।

राष्ट्रसेविका समिति की प्रमुख कार्यवाह सुश्री सीता गायत्री ने कहा – भरतीय समाज में स्त्री के स्थान और योग्यता पर संदेह करने वालों को यह समझना जरूरी है कि इस समाज का आधार और क्षमता अपार हैं।

भारत में महिलाओं का हैप्पीनेस इंडेक्स 63 फीसदी है। ये आंकलन 75 हजार महिलाओं के सर्वेक्षण में जाहिर हुआ है।

विमर्श के 11 सत्रों में ऑफ लाइन और ऑन लाइन कुल 62 शोध पत्र पढ़े गए।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल ने कहा कि दो दिन का यह विमर्श आंखे खोलने वाला है।

अंग्रेजी साहित्य की छात्रा का ‘सिगरेट मुक्तिमार्ग का प्रतीक’ विषयक शोधपत्र में स्त्री विमर्श पर नया नजरिया विकसित हुआ है।

संवर्धिनी व्यास की मेधा जी ने सेमिनार समापन पर धन्यवाद ज्ञापन किया।

‌पदचिह्न टाइम्स।

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