बसंती मठपाल की दो कृतियां ” मन के मौसम” और ” शिखरों के शिलालेख ” का लोकार्पण !
काव्य संग्रह "मन के मौसम" और विविध निबंधों से सजी "शिखरों के शिलालेख" उत्तराखंंड संस्कृति की परिचायक है।

बसंती मठपाल की दो कृतियां ” मन के मौसम” और ” शिखरों के शिलालेख ” का लोकार्पण !
काव्य संग्रह “मन के मौसम” और विविध निबंधों से सजी “शिखरों के शिलालेख” उत्तराखंंड संस्कृति की परिचायक है।
सुपरिचित साहित्यकार डॉ बसंती मठपाल की दो कृतियां ‘मन के मौसम’ और गद्य संग्रह ‘शिखरों के शिलालेख’ का आज देहरादून के प्रबुद्ध पाठकों के बीच लोकार्पण किया गया।
लोकार्पण समारोह में विद्वानों ने डॉ बसंती मठपाल की दोनों पुस्तकों को ज्ञान, संवेदना और अनुभव के अपूर्व भंडार बताया।
सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा – बसंती मठपाल की रचनाओं में हिमालय की पवित्र नदियों की प्रांजलता और जीवंतता है।
मुख्य अतिथि डॉ सविता मोहन ने कहा – दोनो पुस्तकों को देश के शिक्षालयों और पुस्तकालयों में अवश्य होना चाहिए।
ये पुस्तकें हिमालय की संस्कृति और विशेषताओं का परिचय कराती हैं।
हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष और कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ राम विनय सिंह ने कहा – ये पुस्तकें ज्ञानवर्धक भी हैं और आनंदवर्धक भी।
डॉक्टर बसंती मठपाल ने बताया- दोनों पुस्तकें मेरी बरसों की साधना हैं ।
मुझे आशा है – मेरी दोनों रचनाओं को हिन्दी के सुधी व सहृदय पाठक भरपूर स्नेह- प्यार देंगे।
‘मन के मौसम ‘ विविध भाव भरी कविताओं का संग्रह है I
ये जीवन की पीडा, संघर्ष, प्रेम, अभाव, जिजीविषा के विविध रंगों से सज्जित हैं I
महिलाओं और बेटियों की पीड़ा और संघर्ष के स्वर आशा के स्वरो में ढलते जाते है जो जीवन की सफ़लता की राह का संकेत करती है l
शिखरों के शिलालेख – निबंध संग्रह है।
जिसमें उत्तराखंड से संबंधित लेख संग्रहीत हैं I इन निबंधों में उत्तराखंड की संस्कृति, बोली, समस्याओं, त्योहारों, वनस्पतियों के विषय में जानकारी है l
दुबई यात्रा का वृतांत इसके कलेवर को विश्वस्तरीय बनाता है I
— रजनीश त्रिवेदी।