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नेहरू इंस्टीटयूट आफ मांउटनियरिंग उत्तरकाशी के कोर्स 172 से 29 युवा घर नहीं लौट पाए !

भारत के अग्रणी पर्वतारोहण प्रशिक्षण और रेसक्यू संस्थान भी हार गया प्राकृतिक आपदा से।

नेहरू इंस्टीटयूट आफ मांउटनियरिंग उत्तरकाशी के कोर्स 172 से 29 युवा घर नहीं लौट पाए !

भारत के अग्रणी पर्वतारोहण प्रशिक्षण और रेसक्यू संस्थान भी हार गया प्राकृतिक आपदा से।

भारत में पर्वतारोहण के तीन बड़े संस्थान गुलमर्ग जम्मू – कश्मीर, दार्जिलिंग और उत्तरकाशी, उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोर्स चलाते हैं।

विश्व स्तरीय पर्वतारोहण तकनीक सीखने के लिए युवाओं में इतना जोश है कि बेसिक, एडवांस और रेसक्यू कोर्स में भाग लेने के लिए अगले तीन साल तक स्थान खाली नहीं हैं।

निम – नेहरू इस्टीटयूट आफ मांईटनियरिंग के अध्यक्ष भारत के रक्षामंत्री, उपाध्यक्ष उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और प्रशासक प्रिंसीपल रक्षा मंत्रालय के कर्नल स्तर के अधिकारी नामित होते हैं।

पिछले एक दशक से जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम में भारी परिवर्तन देखने में आ रहे हैं।

बेमौसम बारिश और बर्फबारी से प्राकृतिक आपदायें भूस्खलन – हिमस्खलन, बाढ़ और तूफान से जनजीवन प्रभावित है।

4 अक्टूबर को निम के एडवांस कोर्स का पर्वतारोही दल द्रोपदी का डांडा शिखर पर आरोहण के लिए निकला था। द्रोपदी का डांडा शिखर हिमस्खलन यानि एवलांच के लिए सुरक्षित माना जाता है।

निम के बेसिक कोर्स और एडवांस कोर्स के लिए आधार शिविर द्रोपदी डांडा शिखर की तलहटी पर बना है। लगभग दो हफ्ते तक पर्वतारोही यहां बर्फीले शिखरों पर सुरक्षित रहने की तकनीक सीखते हैं।

निम के कोर्स का लक्ष्य युवाओं में साहसिक पर्वतारोहण जैसे खेलों में दक्षता प्रदान करना है।

इस कोर्स में भाग लेने के लिए आर्मी अधिकारी, डाक्टर, इंजीनियर और एडवैंचर टूरिज्म में कैरियर बनाने वाले युवा आतुर रहते हैं।

4 अक्टूबर को कोर्स संख्या 172 के पर्वतारोही जब शिखर आरोहण – समिट कर के वापस कैंप की ओर लौट रहे थे तो अचानक ग्लेशियर टूटने लगा।

कुछ ही पलों में हिमस्खलन – एवलांच ने पूरे दल को अपनी चपेट में ले लिया। पर्वतारोही बर्फ में दबने लगे और बर्फ की दरारों में उलझने से तुरंत राहत और बचाव करना मुश्किल हो गया।

मौसम खराब होने से पहले दो महिला प्रशिक्षक सविता कंसवाल, नौमी रावत और दो प्रशिक्षुओं के शव बरामद हौ गए।

सुश्री सविता कंसवाल एवरेस्ट विजेता रही हैं। सुश्री नौमी रावत कुशल प्रशिक्षक और कई बार इस शिखर पर चढ़ चुकी थी।
5 अक्टूबर को मौसम खराब होने से बचाव कार्य में बाधा हुई।

अगले दिनों में देश के श्रेष्ठ बचाव दलों ने 29 लापता पर्वतारोहियों में 27 के शव बरामद कर लिए।

अब निम, उत्तरकाशी पर तमाम सवाल उठाये जा रहे हैं – बारिश – बर्फबारी की आशंका में हाइटगेन की एक्सरसाइज टाली जा सकती थी ?

भूकंप का समाचार भी उत्तरकाशी जनपद से आया था।  राहतदल को क्या और जल्दी मौके पर बुलाया जा सकता था, निर्णय लेने में कहां देरी हुई।

इस कोर्स में देहरादून के 26 वर्षीय युवा सिद्धार्थ खंडूरी की जान गई है।  सिद्धार्थ सैंट जोसेफ एकेडमी, देहरादून का होनहार छात्र रहा है।

फ्रैंच भाषा में दून यूनिवर्सिटी से स्नातक सिद्धार्थ साहसिक टूरिज्म में सक्रिय था।

योगा प्रशिक्षण में डिप्लोमा प्राप्त सिद्धार्थ खंडूरी हाल में ही श्री केदारनाथ धाम तक साइक्लिंग कर के लौटा था।

पूर्ण शाकाहारी और हनुमान भक्त सिद्धार्थ साहसिक खेलों में ट्रेकिंग – पर्वतारोहण से जुड़ा था।

निम, उत्तरकाशी से 2019 में बेसिक कोर्स करने के बाद सिद्धार्थ को एडवांस कोर्स के लिए चयन 2024 वर्ष के लिए था।  एक सीट खाली होने पर सिद्धार्थ खंडूरी ने बदकिस्मत बैच 172 को ज्वाइन किया।

सिद्धार्थ खंडूरी एक कुशल बाक्सर भी था और पर्वतारोहण में पहले अवसर न मिलता तो सिद्धार्थ बाक्सिंग को अपना कैरियर बनाता।

सिद्धार्थ के परिजन और रिश्तेदार साहसिक पर्यटन उद्योग में काफी सक्रिय हैं।
इस हादसे में जान गंवाने वाले 29 लोगों में से 10 युवा उत्तराखंड से हैं।
— भूपत सिंह बिष्ट

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