
पाकिस्तानी मिलेट्री आपरेशन बदर का मुँह तोड़ जवाब रहा – आपरेशन विजय !
कारगिल युद्ध ने फिर 1962 से बर्फिली पहाड़ियों पर मिलेट्री आपरेशन की पुख्ता तैयारियां रखने का संदेश दिया।
कारगिल युद्ध भले ही जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के साथ लड़ा गया।
इस के पीछे पाकिस्तान और चीन की मिलीभगत भी जगजाहिर हुई।
लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश अब जम्मू कश्मीर से अलग है लेकिन इस की तिब्बत सीमा पर चीन की गतिविधियां हाई एल्टीटयूट वार – बर्फिली पहाड़ियों पर उच्च युद्ध तकनीक विकसित रखने की चुनौती हैं।
कारगिल ज़िले में द्रास सबसे ठण्डा क्षेत्र है।
द्रास में ऑपरेशन विजय के वीर शहीदों की याद में भव्य स्मृति स्थल बना है – 1999 का कारगिल युद्ध किन हालातो में , कैसे लड़ा गया ?
बनस्पतिविहीन चोटियों पर दुश्मन आपरेशन ” बदर ” को अंजाम देने के लिए दो साल की तैयारी से बर्फ़बारी के बीच मोर्चा लगाकर बेठा था।
1999 के मई माह में कारगिल ज़िले की बर्फीली पहाड़ियों पर इस घुसपेठ की रिपोर्ट स्थानीय गडरियों से सेना को मिली थी।
मई से जुलाई माह तक चले “आपरेशन विजय” में एक – एक दुश्मन को मार भगाया गया।
पाकिस्तान अपनी 1971 की हार का बदला उसी बीसवीं सदी में लेकर “पीओके” से लगे हमारे प्रान्त को आपरेशन बदर से हड़पना चाहता था।
लेकिन हर बार की तरह उसे एक बार फिर मुहंतोड़ सबक सिखाया गया।
कारगिल लड़ाई द्रास की चोटियों पर लड़ी गयी है – शहीद स्थल के पीछे नज़र आती टायगर हिल और तमाम चोटियाँ दिल में जोश भरती हैं।
कारगिल युद्ध के शहीदों के लिए आँखे नम हो जाती हैं।
सेना का शौर्य, बलिदान लद्दाख के कारगिल जनपद में द्रास क्षेत्र तक फैला है।
कारगिल आपरेशन विजय लड़ाई का विवरण, रैजिमेंट और शहीदों की मूर्तियाँ भी सैनिक सम्मान के साथ लगी हैं।
– भूपत सिंह बिष्ट