
पीएम केयर फंड को सरकारी घोषित किया जाये – दिल्ली हाई कोर्ट ने अगली तारीख 16 सितंबर !
केंद्र सरकार के एक पन्ने को उच्च न्यायालय ने अपर्याप्त माना – पीएम केयर फंड में विस्तार और गहराई से सरकार जवाब दाखिल करे।
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की बैंच ने केंद्र सरकार के एक पन्ने का जवाब अपर्याप्त माना है।
27 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राइम मिनिस्टर्स सिटीजन एसिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजैंसी सिचुएशन फंड ( पीएम केयर फंड) की घोषणा की थी।
सम्यक गंगवाल ने अपने वरिष्ठ वकील श्याम दीवान के मार्फत कई अपील दायर की हैं – पीएम केयर फंड को सरकारी फंड घोषित करके आर्टिकल 12 के दायरे में लाया जाये। पीएम केयर फंड की समस्त जमा और आडिट रिपोर्ट को तिमाही वेब साइट में अपडेट किया जाये।
पीएम केयर फंड को पारदर्शी बनाने के लिए पब्लिक अथारिटी बनाकर आरटीआई के दायरे में लाया जाए।
सरकार का कहना है कि पीएम केयर फंड एक ट्रस्ट है और पीएम के अलावा रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इस के ट्रस्टी हैं।
केंद्र सरकार का एक अधिकारी आनरेरी बेसिस में सचिव की भूमिका निभाता है।
अपील कर्ता का कहना है – पीएम केयर फंड की वेब साइट सरकारी हायपर लिंक, राजकीय एंबलम अशोक निशान, प्रधान मंत्री कार्यालय आफिसियल एड्रैस साउथ ब्लाक, नई दिल्ली से संचालित हो रहा है।
2019- 20 के वित्तिय वर्ष में इस फंड में 3076 करोड़ से अधिक की राशि मात्र चार दिन में जमा हुई है। इस खाते की हर संभव सुरक्षा के लिए इसे सरकारी, पब्लिक अथारिटी और आरटीए के दायरे में लाना जरूरी है।
अन्यथा सरकार इस प्राइवेट ट्रस्ट फंड से प्रधानमंत्री का नाम , पद, सरकारी चिह्न, पता आदि का उपयोग करने पर अंकुश लगाये।
साथ ही सरकार प्रचार माध्यमों में घोषणा करे कि यह फंड सरकारी नहीं है।
इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए हाई कोर्ट ने अगली तारीख 16 सितंबर तय की है। सरकार की ओर से इस मामले में सालिस्टर जनरल तुषार मेहता पेश हुए हैं।
पदचिह्न टाइम्स।