सीमांत पिथौरागढ़ जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्र पर आने वाले मोदी पहले पीएम!
बॉर्डर के गांव रहें गुलजार - विगत 21 अक्टूबर 2022 को माणा गांव से प्रधानमंत्री ने दिया था संदेश

सीमांत पिथौरागढ़ जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्र पर आने वाले मोदी पहले पीएम!
बॉर्डर के गांव रहें गुलजार – विगत 21 अक्टूबर 2022 को माणा गांव से प्रधानमंत्री ने दिया था संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीमांत के गांवों को गुलजार देखना चाहते हैं।
बीते वर्ष देश के पहले गांव माणा पहुंचकर उन्होंने यह संदेश दिया भी था।
अब एक साल बाद प्रधानमंत्री की भारत नेपाल सीमा के पास आदि कैलाश की यात्रा पर हैं।
इस यात्रा को लेकर जिले के सीमावर्ती गांवों में भारी उत्साह है।
उनमें बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद जगी है। प्रधानमंत्री सीमांत गांव गुंजी और कुटी
के ग्रामीणों से मिल सकते हैं। यह गांव वाइब्रेंट विलेज योजना में चिन्हित है।
उत्तराखंड की 675 किलोमीटर की सीमा चीन और नेपाल से जुड़ी है। सीमा से सटे गांव
सुरक्षा प्रहरी की भूमिका निभा रहे हैं। पलायन इन गांवों बड़ी समस्या है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन गांवों को गुलजार देखना चाहते हैं।
पिछले वर्ष 21अक्टूबर को देश के पहले गांव माणा में जनसभा को संबोधित कर
प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया था। पीएम ने कहा था “बॉर्डर के गांवों में चहल पहल
बढ़ानी है – जिंदा गांव खड़े करने हैं।
बॉर्डर के गांव रहें गुलजार – विगत 21 अक्टूबर 2022 को माणा गांव से प्रधानमंत्री ने दिया था संदेश
बॉर्डर के गांव रहें गुलजार – विगत 21 अक्टूबर 2022 को माणा गांव से प्रधानमंत्री ने अपने
संदेश में कहा – मैं ऐसी स्थिति पैदा करूंगा कि बद्रीविशाल के दर्शन को आने वाले लोग
बद्रीनाथ से ही वापस नहीं जाएंगे बल्कि माणा गांव जरूर आएंगे।”
प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार सीमांत गांवों के विकास के लिए अब वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम
लागू किया गया है। उत्तराखंड में तीन सीमावर्ती जिलों उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के
51 गांवों को इस प्रोग्राम में चिन्हित किया गया है।
इन गांवों में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं
प्राथमिकता से उपलब्ध कराई जाएंगी।
आदि कैलाश आने वाले पहले पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजाद भारत के इतिहास में
पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र के दौरे पर आने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे।
पीएम मोदी 12 अक्टूबर को चीन सीमा के पास 15800 फुट की ऊंचाई पर स्थित
ज्योलिंकांग पहुंचकर आदि कैलाश के दर्शन करेंगे।
पदचिह्न टाइम्स ।