प्रधानमंत्री पहुंचे शिव परिसर छोटा कैलाश और शौका संस्कृति के बीच !
तिब्बत चीन सीमा पर दुर्गम आईटीबीपी ज्योलिंग सुरक्षा पोस्ट पर सेनानियों का मनोबल बढ़ाया।

प्रधानमंत्री पहुंचे शिव परिसर छोटा कैलाश और शौका संस्कृति के बीच !
तिब्बत चीन सीमा पर दुर्गम आईटीबीपी ज्योलिंग सुरक्षा पोस्ट पर सेनानियों का मनोबल बढ़ाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छोटा कैलाश – गुँजी, पिथौरागढ़ यात्रा प्रभावी
संदेश छोड़ रही है।
मानस खंड के अंतिम छोर धारचूला तहसील पर स्थित दारमा, चौंदास और
व्यास घाटी तिब्बत तक फैली हैं।
नरेंद्र मोदी ने दुर्गम बर्फीले क्षेत्र में बसे शौका जनजाति लोगों के बीच
पहुंचकर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रमुख पड़ाव गुंजी में चहल – पहल का अपूर्व मौका
प्रधानमंत्री मोदी ने दिया है।
अन्यथा यात्राकाल में यहां यात्रियों के लिए अस्थायी इमिग्रेशन कार्यालय
और स्टेट बैंक खुलता है।
व्यास घाटी के अंतिम गांव कुटी के लोग छोटा कैलाश में पूजा अर्चना करते हैं।
ज्योलिंगकोंग पोस्ट के हिमवीर पार्वती कुंड पहुंचने वाले पर्यटकों का स्वागत
करते हैं।
यहां से तिब्बत चीन सीमा पार्वती मुकुट की ओर से होने वाली घुसपैठ
पर नज़र रखी जाती है।
कोरोना के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा रूकी हुई है। 1962 के चीन युद्ध के बाद भी
कैलाश यात्रा अवरूद्ध हुई थी।
तब छोटा कैलाश को कैलाश की लघु अनुकृति के रूप में पूजा अर्चना का
सिलसिला निरंतर जारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्वती कुंड के निकट शिव मंदिर पर शिव अराधना की
और छोटा कैलाश के दर्शन किए।
निसंदेह कुमाँऊ मंडल विकास निगम के छोटा कैलाश यात्रा टूरिस्ट सर्किट को
अब पंख की उड़ान मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने छोटा कैलाश – गुंजी क्षेत्र को विश्व फलक पर पहुंचा दिया है।
नेपाल के कुछ शरारती तत्व चीन के प्रभाव में कुटी , कालापानी और नाबीढ़ांग
पर अपना दावा ठोक रहे थे।
तिब्बत सीमा – लीपूपास तक सड़क निर्माण कर भारत ने अपनी सेना और सुरक्षा तंत्र को
पिछले छह दशकों में चाक चौबंद कर लिया है।
प्रधानमंत्री मोदी की व्यास घाटी यात्रा ने नेपाल और चीन को भी दो टूक जवाब दे दिया है।
सीमांत पिथौरागढ़ जनपद की धारचूला तहसील में रंग संस्कृति के शौका समाज के लिए
समग्र विकास के नए आयाम खुले हैं।
— भूपत सिंह बिष्ट, स्वतंत्र पत्रकार।