
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की गणित – इस बार बीजेपी नुक्सान में !
हरिद्वार, देहरादून और उधम सिंह नगर में 30 सीट, नैनीताल, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी में 24 सीट पर है महाभारत।
- भूपत सिंह बिष्ट
विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने उत्तराखंड में बार – बार मुख्यमंत्री बदलकर प्रदेश को अस्थिरता की ओर ही नहीं धकेला बल्कि मजबूत नेतृत्व भी उभरने नहीं दिया है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत यूपी के जमाने से उत्तराखंड प्रदेश के संगठन मंत्री रहे हैं। संघ प्रचारक रह चुके त्रिवेंद्र ठाकुर नेता के रूप में कृषिमंत्री और इस विधानसभा में चार साल दबंग मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
बजट सत्र के दौरान त्रिवेंद्र का इस्तीफा कराकर सांसद तीरथ सिंह रावत को 115 दिन का मुख्यमंत्री बनाया गया।
कोरोना और उपचुनाव के भय से तीरथ का इस्तीफा हुआ और खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी को तीसरा मुख्यमंत्री बनाया गया।
धामी पहली बार में सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी दिग्गज बिशन सिंह चुफाल, सतपाल महाराज, यशपाल आर्य और हरक सिंह रावत के कैबिनेट मंत्री और विधायक रहते पा गए।
बगावत होना स्वाभाविक रहा – धामी ने अपने भारी भरकम मंत्रालय इन बुजुर्ग नेताओं को थमाकर विद्रोह थामने का असफल प्रयास किया।
सबसे पहले अनुसूचित जनजाति के बड़े नेता यशपाल आर्य अपने विधायक बेटे संजीव आर्य के साथ कांग्रेस में लौट आये।
हरक सिंह रावत हर हफ्ते बीजेपी छोड़ने की भभकियां देकर चुनाव से पहले कांग्रेस में लौट गए।
उन के ग्रुप के विधायक बीजेपी में टिकट पा गए हैं और त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में दलबदल का खेल फिर खेल सकते हैं।
चौथी विधानसभा में बीजेपी 57 विधायकों के साथ सदन में रिकार्ड बना चुकी है और अब ग्राफ नीचे की ओर सरक रहा है।
हरिद्वार में 11, देहरादून में 10 और उधम सिंह नगर में 09 सीट यानि कुल 70 में 30 सीट हैं। पिछली बार बीजेपी यहां 25 सीट जीती है।
नैनीताल, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल में 24 सीट हैं।
पिथौरागढ़ में 4, चमोली 3, उत्तरकाशी में 3, रूद्रप्रयाग, बागेश्वर और चम्पावत प्रत्येक जनपद में 2 सीट हैं।
स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जादू ने कांग्रेस पार्टी का सफाया कर दिया और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दो विधानसभा सीटों पर लड़े और दोनों से हार गए।
इस बार हालात बदले हुए हैं – हरीश रावत के साथ बागी यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत और बीजेपी के ठुकराये नेता लौट आए हैं।
देहरादून में 9, हरिद्वार में 8 और उधम सिंह नगर में बीजेपी ने 8 सीटें जीती हैं।
उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी, टिहरी और रूद्रप्रयाग की 20 सीटों में 18 सीट और कुमायूं की पर्वतीय 20 सीटों में बीजेपी ने 16 सीटों पर विजयश्री हासिल की है।
इस बार पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लिखकर देना पड़ा है कि वो अपनी प्रिय डोईवाला सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं।
बीजेपी ने दीप्ति भारद्वाज, राष्ट्रीय महिला मोर्चा महामंत्री को डोईवाला से टिकट दिया और फिर विद्रोह के दबाव में पहली बार चुनाव लड़ रहे बृजभूषण गैरोला को मैदान में उतारा है।
टिहरी में किशोर उपाध्याय को बीजेपी ने टिकट देकर कांग्रेस के हारे हुए प्रदेश अध्यक्ष पर दाव खेला है।
बीजेपी में कांग्रेस के दलबदलुओं का बढ़ता वर्चस्व बौखलाहट और कमजोरी का परिचायक है।
पदचिह्न टाइम्स।