
तीन कृषि बिल रद्द करने का प्रस्ताव पहले कैबिनेट मीटिंग में !
नवंबर के संसद शीत सत्र में इतिहास बन जायेंगे – मोदी के बहुचर्चित कृषि कानून।
चर्चा है कि 24 नवंबर की कैबिनेट मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वापस लिए गए कृषि कानून को समाप्त करने की मोहर लग जायेगी। 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीत सत्र में ये कृषि कानून रद्द हो जायेंगे।
उल्लेखनीय है कि विगत 19 नवंबर को गुरू पर्व के दिन टीवी पर अचानक प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कानून वापस लेने की घोषणा की थी।
अचानक लिए गए इस फैसले को उत्तर प्रदेश व पंजाब के कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा से जोड़कर देखा जा रहा है।
पिछले एक साल से किसान संगठन दिल्ली बार्डर पर धरना – प्रदर्शन चला रहे हैं और सात सौ से अधिक आंदोलनकारी प्राण गंवा चुके हैं।
भाजपा सरकार ने किसान आंदोलन को दबाने के हर संभव उपाय किए हैं और किसान नेताओं के खिलाफ मुकदमें दर्ज किये गए हैं।
अब पंजाब, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में किसान आंदोलन की नाराजगी भाजपा सरकार के लिए सत्ता की बड़ी चुनौती है।
आंदोलनकारियों को आंदोलनजीवी से लेकर तमाम तुच्छ नामों से भाजपा नेताओं व मंत्रियों ने पुकारा लेकिन दिल्ली कूच रोकने पर किसान बार्डर पर बेमयादी धरने पर सपरिवार बैठे हुए थे।
अब चुनाव के चलते भाजपा किसान आंदोलन को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है।
उधर किसान संगठन भाजपा सरकार से चुनाव पेशगी के रूप में अपने कृषि उपज के शलिए न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी कानून चाहते हैं और तभी धरना समाप्त करने की बात कर रहे हैं।
भाजपा ने अपने संगठन में विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री, ट्राइबल नेता आशा लाकड़ा व रितुराज सिन्हा को नेशनल सेक्रेटरी तथा भारती घोष व शहजाद पूनावाला को पार्टी प्रवक्ता बनाया है।
अभी तक टीवी चैनलों पर शहजाद पूनावाला बीजेपी का सपोर्ट करते रहे हैं।
पदचिह्न टाइम्स।