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रीजांग -ला शहीद स्मारक – 13 कुमायूं के 114 अमर शहीदों की दास्ताँ !

चीन के साथ लदाख सीमा पर विपरीत हालातों में लड़ी गई सबसे भीषण लड़ाई।

 

रीजांग -ला शहीद स्मारक – 13 कुमायूं के 114 अमर शहीदों की दास्ताँ !

चीन के साथ लदाख सीमा पर विपरीत हालातों में लड़ी गई सबसे भीषण लड़ाई।

अक्टूबर – नवंबर 1962 में चीन ने भारत पर धोखे से युद्ध छेड़ दिया।

 


1947 में आजाद हुआ देश अपने पैरों पर खड़े होकर मिलेट्री और सिविल सेवाओं के लिए संसाधन जुटा रहा था।

भारत ने चीन के साथ पंचशील समझौता किया लेकिन हिंद – चीनी भाई – भाई का संवाद धोखा साबित हो गया।

भारत माता की रक्षा में सेना के जवानों ने अबूझ पहाड़ियों पर चीनी सेना के साथ लोहा लिया।

भयंकर सर्दी और बर्फबारी के बीच कश्मीर – लदाख से लेकर हिमालयी राज्य अरूणाचल तक चीन की सेना ने सोची समझी रणनीति के तहद भारत की अपूर्ण तैयारियों का फायदा उठाकर युद्ध छेड़ा था।

लदाख की तिब्बत सीमा पर रीजांग – ला की पहाड़ी पर C कंपनी 13 -कुमायूं रेजिमेंट के 124 जवान तैनात थे।

इन जवानों का लक्ष्य चीनी सेना को चुशूल एयर बेस तक पहुंचने से पहले रोकना था।

तिब्बत की ओर से लदाख आने – जाने के रास्ते चरवाहों, धार्मिक और बिजनेस यात्रा करने वाले स्थानीय लोगों को ही मालूम थे।

18 नवंबर 1962 को रीजांग – ला पर चीन की बड़ी हथियार बंद सेना के आगे मेजर शैतान सिंह की कुमायूं रेजिमेंट के जवान  “आखिरी गोली – आखिरी आदमी ” के मूल मंत्र के साथ डटे रहे।

124 लोगों की कंपनी में 113 जवान मौके पर शहीद हो गए।

5 जवान चीनी सेना ने युद्ध बंदी बनाए और मात्र 6 घायल जवान बटालियन हैड क्वार्टर तक लौट पाए।

एक युद्ध बंदी की चीनी सेना की हिरासत में मौत हुई।

युद्ध के तीन माह बाद एक गडरिये ने रीजांग – ला के युद्ध क्षेत्र में भारतीय सेना के शहीद जवानों के शव देखे जाने की सूचना दी।

भारतीय सेना के अदम्य साहस के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र, 7 वीर चक्र (5 मरणोपरांत) तथा 4 सेना मैडल 13 कुमायू रेजिमेंट को दिए गए।

फरवरी 1963 में चीनी अधिकारियों, इंटरनेशनल रेडक्रास और अन्य संस्थाओं के सहयोग से रीजांग – ला की युद्ध भूमि में 96 शहीद जवानों के शव बरामद हुए।

युद्ध की वीभिषका का अहसास तीन माह बाद सूचना विभाग के कैमरे में कैद हुआ।

मेजर शैतान सिंह की अंगुलिया ट्रिगर पर थी और उनका पार्थिव शरीर भी तीन माह बाद राजकीय सम्मान के साथ जोधपुर, राजस्थान 16 फरवरी 1963 को अंतिम संस्कार हेतु ले जाया गया।

शेष पार्थिव शरीरों को मुखाग्नि ब्रिगेडियर टीएन रैना ने चुशूल के मैदान में दी – जहां 13 कुमायूं रेजिमेंट के 114 अमर शहीदों का स्मारक बनाया गया है।

गत वर्ष नवंबर 2021में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रीजांग -ला शहीद स्मारक को भव्यता प्रदान की है।

देश की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वाले रणबांकुरों को यथोचित सम्मान देने के लिए लदाख आने वाले पर्यटक सुदूर चुशूल तक पहुंच रहे हैं।
– भूपत सिंह बिष्ट

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