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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन – बत्ती गुल मीटर चालू अभी जारी है !

बिजली बिल बने अबूझ पहेली - गणित के सारे फार्मूले लगाने के बाद भी नहीं जान सकते डिमांड राशि।

उत्तराखंड पावर कारपोरेशन – बत्ती गुल मीटर चालू अभी जारी है !

बिजली बिल बने अबूझ पहेली – गणित के सारे फार्मूले लगाने के बाद भी नहीं जान सकते डिमांड राशि  – भूपत सिंह बिष्ट

उत्तराखंड पावर कारपोरेशन ने अब बिल निर्माण की प्रक्रिया बदल दी है।

कहने को तो बिल प्रति दिन के आधार पर बनाने का दावा है लेकिन सारी गुणा – भाग के लिए कंप्यूटर दिमाग होना जरूरी है।

सितंबर माह में जारी बिल में जुलाई – अगस्त की खपत ने पिछले रिकार्ड तोड़ डाले हैं – कई बिल पचास प्रतिशत की वृद्धि पार कर गए हैं।

ऐसे में बिजली बिल की गणना करना बहुत जरूरी हो गया है।

पहली जानकारी यही है कि उत्तराखंड पावर कारपोरेशन दोनों हाथों से उपभोक्ता को निचोड़ने के नित नई तिकड़म ढूंडती है।

साल के बारह महीने को अब 365 दिनों में बदला गया है।

मीटर रीडर की दया पर उपभोक्ता को बिल निश्चित एक या दो माह की जगह 63 दिन या 70 -80 दिन का भी दिया जा सकता है।

उपभोक्ता की इच्छा पर रीडर पाक्षिक या मासिक बिल वसूली के लिए तैयार नहीं है।

उर्जा प्रदेश में आम आदमी के लिए विद्युत मूल्य का सलैब रूपये 6.55 प्रति यूनिट अधिकतम कमर तोड़ हो चुका है।

मीटर रीडर अस्पष्ट बिल गेट पर फंसा के निकल जाते हैं क्योंकि विद्युत बिल की छपाई अनुरूप कागज पर नहीं है।

खपत विद्युत मूल्य का भुगतान करने के अलावा हर उपभोक्ता से तीन अन्य अधिभार वसूली भी जारी हैं।

ऐसा लगता है – बत्ती गुल मीटर चालू की अगली कड़ियां बनायी जा रही हैं।

विद्युत मूल्य के अलावा बड़ी वसूली फिक्सड चार्जेस है – जो किसी भी बिल में निश्चित यानि फिक्सड नहीं है।

 

पहले इसे मीटर किराये के नाम पर भी वसूला जाता रहा है – अब ये किराया प्रतिदिन छह रूपये नब्बै पैसे है तो तीन केवि का फिक्सड चार्जेस रू 434.95 बैठता है – जो कहीं से फिक्स नहीं है।

हर माह मीटर किराया और केवि प्रभार वसूलने का क्या औचित्य है ?
जब सिक्योरिटी जमा कर के परमानेंट क्नेक्शन लिया है और सारे खर्च अग्रिम भुगतान में यूपीसीएल ने वसूले हैं।

अब बाकि 302 दिन का किराया अलग मौसम में अलग विद्युत खपत पर निर्भर होगा और उपभोक्ता नुक्सान में रहेगा।

दूसरी वसूली फ्यूल चार्जेस के नाम से की जा रही है।

बिजली बिल में 0.05 प्रति यूनिट की दर से एक हजार यूनिट के लिए पचास रूपए चुकाने हैं।
यदि बिजली विभाग के ऐसे उपभोक्ता दस करोड़ हो, तो पांच सौ करोड़ अधिभार से कमायी हो रही है।

यूपीसीएल तीसरी वसूली विद्युत कर 0.15 प्रति यूनिट के दर से कर रहा है।
दो माह में 1036 यूनिट की खपत पर ये अधिभार रू 155.40 बैठता है।

लगभग बारह फीसदी कुल अधिभार उपभोक्ता विद्युत मूल्य के अलावा चुकाने को मजबूर है।

भले ही बीजेपी – कांग्रेस बिजली बिल के इस खेला से आंखे मूंद रही है।

तभी आम आदमी पार्टी बिजली बिल में राहत की वकालत से वोटरों को लुभाने में कामयाब हो रही है।
– भूपत सिंह बिष्ट

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