संगीन वारदात टिहरी ट्रेजरी से ढाई करोड़ का गबन नमिता सिंह ने लिखायी एफआईआर !
ट्रेजरी कर्मियों ने मृत पैंशनरों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर अपने परिचितों के खाते में डाली रकम , अब पुलिस की हिरासत में आए हैं।

संगीन वारदात टिहरी ट्रेजरी से ढाई करोड़ का गबन नमिता सिंह ने लिखायी एफआईआर !
ट्रेजरी कर्मियों ने मृत पैंशनरों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर अपने परिचितों के खाते में डाली रकम , अब पुलिस की हिरासत में आए हैं।
कंप्यूटर के मौजूदा दौर में पैंशनरों के भुगतान का लेखा – जोखा जहां सुगम है लेकिन यदि बाड़ ही खेत खा जाए या अधिकारियों को अपने जनपद के पैंशनरों को भुगतान राशि का आंकलन ना हो तो कोई भी कर्मचारी करोड़ों की चपत फुलप्रूफ मंहगे सिस्टम को लगा सकता है।
विगत दिवस वरिष्ठ कोषाधिकारी टिहरी श्रीमती नमिता सिंह द्वारा थाना नरेंद्रनगर पर तहरीर देते हुए बताया कि कोषागार नरेंद्रनगर में कार्यरत कोषाधिकारी जगदीश चंद्र, लेखाकार विनय कुमार चौधरी तथा पीआरडी सोहबत सिंह पडियार के द्वारा विगत कुछ वर्षों से कोषागार के ई-पोर्टल पर लॉगिन कर पेंशनर्स के डाटा में छेड़छाड़ व कूट रचना कर पेंशनर के बैंकखातों के स्थान पर स्वयं अपने तथा अपने परिचितों के बैंक खातों में फर्जी तरीके से पेंशन/एरियर का भुगतान कर सरकारी धन का गबन किया गया है।
तहरीर पर थाना नरेंद्रनगर में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया तथा प्रथम दृष्टया ₹ 2,48,46,829/-(दो करोड अडतालिस लाख छियालिस हजार आठ सौ उनत्तीस) का गबन पाया गया।
अभियुक्तों द्वारा गबन राशि का विवरण !
1 – जगदीश चंद्र (कोषाधिकारी) गबन की गई धनराशि पांच लाख तेरह हजार पांच सौ बयालिस ( ₹5,13,542/-)
2 -विनय कुमार चौधरी (लेखाकार) गबन की गई धनराशि एक करोड़ उन्नीस लाख अड़सठ हजार पांच सौ नवासी ( ₹ 1,19,68,579/-),
3 -सोहबत सिंह (पीआरडी, नरेंद्रनगर कोषागार) गबन की गई धनराशि तेइस लाख छियालिस हजार सात सौ अड़तालिस ( ₹ 23,46,748/-)
4 – कल्पेश भट्ट (क्लर्क, पशुपालन विभाग नरेंद्रनगर) गबन की गई धनराशि छब्बीस लाख चव्वन हजार तीन सौ दो (₹ 26,54,302/-),
5 – रणजीत कुमार–गबन की गयी धनराशि एक करोड़ उनतालिस हजार तीन सौ पचीस ( ₹ 1,39,325/-)
पांचों अभियुक्तों का कुल योग एक करोड़ 76लाख 22 हजार 496 बैठता है।
वरिष्ठ कोषाधिकारी श्रीमती नमिता सिंह द्वारा गबन की राशि दो करोड़ अड़तालिस लाख से अधिक बतायी गई है यानि अभी 72 लाख 24 हजार 333 की राशि का हिसाब कम है।
सरकारी खाते से गबन का यह प्रकरण कई सालों से चल रहा है। संभवता मृत पैंशनरों के डाटाबेस में छेड़छाड़ कर इस प्रकार का घोटाला अन्य जनपदों में भी हो सकता है।
यह चूक ट्रेजरी अधिकारियों के साथ आडिट विभाग की घनघोर लापरवाही पर भी इशारा करती है।
जुर्म के संगीन होने तथा धोखाधड़ी एवं कूटरचना कर भारी मात्रा में सरकारी धन का गबन किए जाने पर नवनीत सिंह भुल्लर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अभियुक्तगणों को 24 घंटे से भी कम समय में गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।
ऐसे किया करोड़ो का गबन बिना खौफ एंट्री करते रहे सरकारी पोर्टल पर
पूछताछ में अभियुक्तगणों द्वारा बताया गया कि हम लोग ज्यादातर उन पेंशन फाइलों में गबन करते थे जिन पेंशनर्स की मृत्यु हो चुकी है।
फिर हम लोग ई-पोर्टल में उनके GRD नंबर पर उन्हें जीवित दर्शा कर उनके खातों तथा नाम को कूटरचना कर अपने परिचितों का खाता नंबर/ नाम आदि डालकर जालसाजी से रुपया अपने परिचितों के खाते में डालते थे।
इसके पश्चात अपने परिचितों को कमीशन के रूप में कुछ रुपये देकर बाकी सारे रुपये वापस ले लेते थे। इस प्रकार षड्यंत्र के तहत धोखाधडी कूटरचना एवं फर्जीवाड़ा कर सरकार के खाते से गबन में शरीक रहे हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय जनपद टिहरी गढ़वाल द्वारा टिहरी पुलिस की त्वरित कार्यवाही पर पुलिस टीम को नगद 2500/-रुपये की धनराशि से पुरस्कृत किया गया।
अभी यह ज्ञात नहीं है कि इन अभियुक्तों से सरकारी खजाने से लूटी गई कितनी राशि बरामद करायी गई है।
पदचिह्न टाइम्स।