देहरादून में जनमानस और गोर्खा रेजिमेंट का अराध्य संतला देवी दरबार !
नून नदी के तट से संतोड़गढ़ गांव की ओर पहाड़ी पर स्थित इस सिद्ध पीठ में कभी बलि प्रथा रही।

देहरादून में जनमानस और गोर्खा रेजिमेंट का अराध्य संतला देवी दरबार !
नून नदी के तट से संतोड़गढ़ गांव की ओर पहाड़ी पर स्थित इस सिद्ध पीठ में कभी बलि प्रथा रही।
देहरादून की नैसर्गिक सुंदरता के संरक्षण में आर्मी कैंट एरिया
बड़ी भूमिका निभाते हैं।
छावनी क्षेत्र के इर्द – गिर्द हरियाली के बड़े भू भाग और साफ – सफाई
देहरादून को विशिष्ट नगर बनाते हैं।
गढ़ी कैंट में जहां भगवान शिव के टपकेश्वर महादेव स्वरूप की महिमा है – यहां से
लगभग आठ किमी दूर घंघोड़ा कैंट क्षेत्र को पारकर नून नदी के तट पर
धोलास और गल्जीवाड़ी गांव की बड़ी बसावट है।
ये क्षेत्र भारत के विशिष्ट विपश्यना साधना शिविरों में एक देहरादून शिविर
की पहचान दिलाता है।
वैसे नून नदी का तट और माँ संतला देवी मंदिर गढ़ी कैंटवासियों की दिनचर्या
का सदियों से हिस्सा बने हुए है।
अपनी मनोकामना के लिए कुछ दशक पहले संतला देवी में बकरे की बलि प्रथा
भी रही है। मंदिर में लगे नोटिस अनुसार नैनीताल हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर में
बलि प्रथा का निषेध कर दिया है।
अब संतला देवी मंदिर देहरादून में अपनी प्राकृतिक सुंदरता नून नदी और आच्छादित
वन क्षेत्र के लिए मनोरम अध्यामिक पर्यटन का केंद्र है।
गोर्खा बहुल क्षेत्र होने के कारण संतला देवी को इष्ट देवी कह
सकते हैं। गोर्खा रेजिमेंटस नेसंतला देवी मंदिर परिसर को निखारने और
रास्ते को मुख्यमार्ग तक सुगम बनाने में आम श्रद्धालुओं का निरंतर
सहयोग किया है।
कभी नीचे सड़क से संतला देवी की एक किलोमीटर चढ़ाई तय करने के
लिएकच्चा पथरीला और धूलभरा रास्ता था।
हाई स्कूल – इंटर की छात्रायें परीक्षा में सफलता की कामना के लिए
हाजिरी देने आती हैं ।
अब युवा, नव विवाहित, नन्हे मुन्ने बच्चों के साथ दम्पति और बुजुर्ग
महिला – पुरूष परिवार और भविष्य की खुशहाली के लिए संतला देवी में
प्रार्थना करने पहुंचते हैं।
मंदिर में दर्शन के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक नून नदी में पिकनिक करते देखे जाते हैं।
अमूमन शनिवार और रविवार को यहाँ दर्शनार्थियों की भीड़ जुटती है।
मंदिर में माता संतला देवी की प्रतिमा के साथ उन के भाई की पूजा की जाती है।
मंदिर परिसर में मनोकामना वट वृक्ष में श्रद्धालु चुनरी बांधकर संकल्प करते हैं।
मंदिर के चारों ओर घनी हरियाली है। वर्षा जल संग्रह कर
कुआँ निर्मित है।
अधिकांश जलपान दुकानों का संचालन महिलायें करती हैं।
मंदिर में हर तरफ ध्यान करने और दूर तक नदी और घाटी निहारने के लिए बैठने
की उत्तम व्यवस्था है।
शाल, जामुन, आम और चकोतरे के पेड़ क्षेत्र को घनी छाँव प्रदान करते हैं।
निसंदेह हल्की ट्रेकिंग, माँ संतला देवी दर्शन और नून नदी में पिकनिक के लिए
देहरादून की खास पसंद है।
— भूपत सिंह बिष्ट, स्वतंत्र पत्रकार।