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प्रधानमंत्री मोदी की सौगात अध्यात्मिक स्मार्ट हिल टाउन श्री बदरीनाथ धाम !

श्री बदरीनाथ मंदिर को ढक रहे निर्माण हटाये जायेंगे और शंकराचार्य का बदरीश धाम अब नया आकार ले रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की सौगात अध्यात्मिक स्मार्ट हिल टाउन श्री बदरीनाथ धाम !

श्री बदरीनाथ मंदिर को ढक रहे निर्माण हटाये जायेंगे और शंकराचार्य का बदरीश धाम अब नया आकार ले रहा है।

देवभूमि उत्तराखंड के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नायाब परियोजना श्री बदरीनाथ धाम के कायाकल्प पर काम जारी है।

इस वर्ष 2022 में चारधाम की ओर देश व विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहले माह में हाजिरी लगा चुके हैं।

रजिस्ट्रेशन में देरी के चलते कुछ दिनों तक हरिद्वार व ऋषिकेश में यात्रियों को असुविधा हुई।

पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद गढ़वाल तीरथ सिंह रावत ने उच्च अधिकारियों को आगाह किया तो चार धाम यात्रा को फिर गति मिली है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी चार धाम यात्रा के लिए हाई पावर मानिटरिंग कमेटी बनायी है।

फिलहाल श्री बदरीनाथ धाम के यात्रियों को पीपलकोटी से जोशीमठ व जोशीमठ से बदरीनाथ मार्ग पर कुछ देर के लिए जाम झेलना पड़ रहा है।

 


पुलिस की टीम जोशीमठ और बदरीनाथ के बीच निरंतर ट्रैफिक को रेगुलेट कर रही है।

श्रीबदरीनाथ धाम छोड़ने वाली गाड़ियों को प्राथमिकता से निकाला जा रहा है ताकि आने वाले नए श्रद्धालुओं की गाड़ियों को स्थान मिले।

बिना विलंब जोशीमठ – बदरीनाथ के लिए बाई पास की ज्वलंत समस्या से प्रशासन को निपटना है ताकि श्री बदरीनाथ परियोजना को प्रधानमंत्री मोदी के अनुरूप सुलभ बनाया जा सके।

स्प्रीचुएल स्मार्ट हिल टाउन बदरीनाथ के पहले चरण में धाम से लगी संपत्तियों का मुआवजा देकर ध्वस्तिकरण जारी है।  सरकार में निहित धर्मशालायें और पंडा समाज के भवनों को इस श्रेणी में रखा गया है।

श्री बदरीनाथ धाम के इर्द गिर्द अब बेतरतीब मकानों से मुक्ति मिलेगी और श्रदालुगण दूर से अपने इष्ट देव धाम का दर्शन करेंगे।

 


लाखों की संख्या में बदरीनाथ पहुंच रहे यात्रियों के लिए प्रबंध केंद्र बनना है।

यात्रियों के लिए आगमन प्लाजा बनेगा।

वन वे मार्ग पर अंतर – राष्ट्रीय बस अड्डे का निर्माण किया जा रहा है।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ मंदिर न्यास, श्री केदारनाथ धाम, काशी कारिडोर जैसे सौंदर्यकरण के बाद अब श्री बदरीनाथ धाम के सम्मुख अलकनंदा रिवर फ्रंट को नायाब ढंग से सजाया जाना है।

बदरीनाथ में झील निर्माण कर यात्रियों को नर – नारायण पर्वत माला की दिव्यता को नया आयाम मिलना है।

प्रधानमंत्री मोदी की अनूठी परियोजना का स्वागत कर रहे पंडा समाज को आशंका है कि सदियों पुरानी उन की रिहायश को नज़र अंदाज किया जा सकता है।

आईएसअधिकारियों के साथ शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित इस मंदिर में पंडा समाज की पूजा – अर्चना के अधिकारों को अक्षुण्ण रखना जरूरी है।

धर्म स्थल मात्र टूरिस्ट माडल न होकर सदियों से अध्यात्मिक शक्ति केंद्र बने रहें।

होटल कर्मचारियों का मानना है कि बदरीनाथ धाम की क्षमता प्रतिदिन पंद्रह हजार तय करना गैर वाजिब है।  अधिकारियों ने होटल, लाज, सराय आदि में उपलब्ध क्षमता के अनुसार दैनिक क्षमता का आंकलन करना चाहिए।

यात्री दर्शन के लिए जोशीमठ, पीपलकोटि, चमोली और आसपास के होटल व लाज का इस्तेमालकर आ -जा सकते हैं।

मंदिर समित के एक वरिष्ठ कर्मी का मानना है कि होटल व्यवसायी भीड़ देखकर श्रद्धालुओं की जेब काटने से बाज नहीं आते हैं। सुबह जिस कमरे का किराया एक हजार होता है, शाम होते ही उस के लिए पांच गुना वसुली की जाती है।

अत: यात्रियों के रजिस्ट्रेशन में कोई बुरायी नहीं है।

यात्रा के साथ – साथ भारी मशीनों के उपयोग से अध्यात्मिक स्मार्ट हिल टाउन बदरीनाथ का निर्माण जोर – शोर से जारी है।
-भूपत सिंह बिष्ट

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