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जेएनयू की छवि बदलकर आईआईएम के बराबर लाना है – वीसी शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित !

छात्र वामपंथी बनने नहीं - उच्च शिक्षा के लिए आते हैं, दस प्रतिशत मानसिकता सब का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

जेएनयू की छवि बदलकर आईआईएम के बराबर लाना है – वीसी शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित !

छात्र वामपंथी बनने नहीं – उच्च शिक्षा के लिए आते हैं, दस प्रतिशत मानसिकता सब का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

भारत की सबसे चर्चित जेएनयू यूनिवर्सिटी दक्षिणपंथियों के लिए कामरेडस का अड्डा दिखता है।

जेएनयू की लाख अच्छाई के बाद भी शिक्षा परिसर के बाहर इसे तमाम बुराई के रंग में पोता जाता रहा है।

भारत की सबसे ज्यादा पुरस्कृत यूनिवर्सिटी में प्रखर शिक्षाविद प्रोफेसर शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित को जेएनयू की पहली महिला कुलपति बनाया गया है।

तमिल विद्वान शांतिश्री जेएनयू से पीएचडी और मद्रास के प्रेजीडेंसी कालेज से गोल्डमैडलिस्ट छात्रा रही हैं।  13 वीं उपकुलपति के रूप में शातिश्री पंडित को फरवरी 22 में नियुक्ति मिली।

जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय में महिला विद्वान उपकुलपति को लेकर वामपंथी संगठनों ने तमाम शंकायें जाहिर की हैं।

शांतिश्री पंडित मुखर रहती हैं कि वामपंथी जब दूसरी आस्थाओं को समझने व सहने को तैयार नहीं है तो विचारों में अनेकता , सहनशीलता और विवाद के दावे झूठे पड़ जाते हैं।

वामपंथ के बाहर विचार भिन्नता की सहमति नहीं है – ये परिकल्पना ही गलत है।

उपकुलपति का मानना है कि भारत का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा संस्थान कुछ लोगों के शोर से देश में गलत छवि ले रहा है।  जेएनयू की छवि को सुधारना, शिक्षण माहौल को छात्रों के लिए मजबूत करना पहली प्राथमिकता है।

जेएनयू के प्रबंधन स्कूल को आईआईएम के बराबर लाना है।

जेएनयू में हाईब्रिड कक्षायें शुरू की जायेंगी ताकि परिसर की पढ़ाई को सुदूर ग्रामीण अंचलों तक सुलभ कराया जा सके।

जेएनयू के परिसर विश्व में हर जगह खोलने के प्रस्ताव हैं। जेएनयू के 85 प्रतिशत छात्र – छात्रायें कमजोर आर्थिक वर्ग से हैं और उन के हितों का संरक्षण जरूरी है।

छात्र जेएनयू में वामपंथी बनने नहीं, उच्च शिक्षा के लिए आते हैं। यह पालिटिकल पार्टियों की पौधशाला नहीं है।

समय के साथ नए निर्माण, सेवायोजन, शिक्षकों की पदोन्नति, परिसरों की साफ सफाई, लाइब्रेरी और कैंटीन समय विस्तार जैसे विषय तय हो रहे हैं।

छात्राओं के शोषण के मामलों में मेरा संरक्षण हमेशा छात्राओं के साथ है। छात्राओं का सशक्तिकरण शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य है सो नई सुरक्षा एजैंसी की नियुक्ति की गई है।

मेरे समय में जेएनयू की संख्या 3 हजार थी और अब संख्या 10 हजार के करीब है सो परिसर में सुविधाओं को जुटाना चुनौती है।
जेएनयू के छात्रों को डिग्री के बाद नौकरी हो सो स्किल डैवल्पमेंट के कोर्स चलाए जा रहे हैं।

इस साल आधे नए प्रवेश छात्राओं को दिये गए हैं। छात्रों से संवाद चाय और नाश्ते के साथ चलता है और जल्दी ही जेएनयू की वामपंथी छवि अब माँ सरस्वती के पवित्र शिक्षा परिसर के रूप में होगी।
पदचिह्न टाइम्स।

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