
बड़ी पार्टी में नेताओं का जमघट यानि मेंढकों की तराजू तौल !
कांग्रेस के पाले में लौटे यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, केशर सिंह नेगी और मनीष खंडूडी हैं नए सुबेदार।

2022 के पांचवीं विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर फिसड्डी साबित हुई।
यह दूसरी बात है कि कांग्रेस के 10 बागी और पिछली विधानसभा के 2 निर्दलीय बीजेपी की टैली को 47 तक पहुंचाने में कामयाब रहे।
अब महाभारत इन 10 पूर्व कांग्रेसियों को सत्ता में भागीदारी ना मिलने पर होना है।
बीजेपी को छोड़ने का सिलसिला 2021 से शुरू हुआ – आसनसोल के वर्तमान सांसद बाबुल सुप्रीयो जो केंद्र में मंत्री भी रहे बंगाल चुनाव के बाद बीजेपी छोड़ गए।
अब आसनसोल में सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी टिकट पर बीजेपी की खिलाफत करेंगे और बाबुल सुप्रीयो बंगाल विधानसभा का उपचुनाव लड़ रहे हैं।
फिलहाल उत्तराखंड की बात करें तो बीजेपी कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने चुनाव से दो माह पहले और दूसरे कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने चुनाव की घड़ी में बीजेपी से घर वापसी की है।
यशपाल आर्य फिर विधानसभा चुनाव जीत गए हैं और हरक सिंह रावत ने चुनाव नहीं लड़ा। दोनों नेता उत्तराखंड विधानसभा में आज तक चुनाव नहीं हारे हैं।
राहुल गांधी की 2019 चुनावी रैली में बीजेपी पूर्व मुख्यमंत्री जनरल खंडूडी के पुत्र मनीष खंडूडी का कांग्रेस में आना, उत्तराखंड भाजपा के लिए झटका कम लेकिन शर्मिंदगी ज्यादा रही है।
इस बार भी मुख्यमंत्री खंडूडी की बीजेपी विधायक बेटी रीतु खडूडी भूषण को पहली लिस्ट में टिकट नहीं मिला।
उन की यमकेश्वर सीट पर पूर्व कांग्रेसी रेनु बिष्ट को बीजेपी ने टिकट दिया।
कहा जा रहा है – पूर्व मुख्यमंत्री और गढ़वाल लोकसभा सांसद तीरथ सिंह रावत ने रीतु खडूडी की वकालत और जीताने की जिम्मेवारी ली तो पार्टी ने कोटद्वार की मुश्किल सीट पर उतार दिया – अब रीतु खडूडी दूसरी बार की विधायक और मंत्री पद के लिए पढ़ी – लिखी सुयोग्य दावेदार हैं।
मनीष खडूडी का पूरा प्रकरण पूर्व केंद्रीय मंत्री, गढ़वाल सांसद और प्रदेश मुख्यमंत्री रहे जनरल भुवन चन्द्र खंडूडी की भाजपा में हो रहे निरंतर अपमान से जुड़ा है।
रक्षा संसदीय समिति के अध्यक्ष पद से गढ़वाल के लोकसभा सांसद जनरल खंडूडी की अपमानजनक विदाई मोदी सरकार ने की थी — जब जनरल खण्डूडी ने देश की रक्षा में पुराने हथियार, गोला – बारूद और बजट की तंगी का मुद्दा संसदीय रिपोर्ट में उठाया था।
तब जनरल खंडूडी को देश रक्षा की चिंता करने के एवज में संसदीय रक्षासमिति के अध्यक्ष पद से ही चलता कर दिया गया।
मनीष खंडूडी ने सांसद पिता जनरल खंडूडी के अपमान के विरोध में भाजपा को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
रक्षा रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस भी मुखर रही क्योंकि उत्तराखंड के दो बार के मुख्यमंत्री और अटल जी की केंद्र सरकार में भूतल, सड़क एवं परिवहन मत्री के रूप में जनरल खंडूडी की छवि अखिल भारतीय स्तर पर ईमानदार और कर्मठ नेता की बनी थी और तब भाजपा का नारा था — खंडूडी है जरूरी !
मनीष खडूडी 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर सवा तीन लाख वोटों से हारे हैं।
मनीष खंडूडी के साथ गढ़वाल के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केसर सिंह नेगी ने भी कांग्रेस का हाथ थामा है और इस बार चौबट्टाखाल से सतपाल महाराज से विधानसभा चुनाव भी हारे हैं।
केसर सिंह नेगी पूर्व में पौड़ी ब्लाक प्रमुख भी रह चुके हैं और भाजपा के दो दशक तक पौड़ी नगर में मजबूत स्तंभ रहे हैं।
— भूपत सिंह बिष्ट