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तालिबान ने अब महिलाओं को सर से पैर तक बुर्के का फरमान सुनाया !

20 साल की महिला आजादी और सशक्तिकरण धार्मिक कट्टरता में तहस - नहस कर डाला।

तालिबान ने अब महिलाओं को सर से पैर तक बुर्के का फरमान सुनाया !

20 साल की महिला आजादी और सशक्तिकरण धार्मिक कट्टरता में  तहस – नहस कर डाला।

तालिबान -2 का अफगानिस्तान राज मुस्लिम कट्टर लोगों को भले ही सुहाना लग रहा हो। हकीकत में अफगानिस्तान की आधी आबादी महिलाओं के लिए यह नर्क साबित हो रहा है।

तालिबान राज का पहला दौर 1996 – 2001 को अमेरिका ने खत्म किया था।

अमेरिका और यूरोपीय देशों ने पिछले साल 2021 तक अफगानिस्तान में लोकतंत्र स्थापना की कोशिश इस्लामी कट्टरता के बीच की।
20 सालों तक अमेरिका की फौज विदेशी जमीन पर अमन चैन के नाम पर अपनी उर्जा बरबाद करती रही।

इस का उलटा परिणाम अमेरिका की राजनीति में सत्ताधारी दल को भुगतना पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने चुनाव पूर्व ही घोषणा कर दी थी कि अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज वापस बुलायी जायेगी।

इस का असर अफगानिस्तान में जबर्दस्त पलायन के रूप में देखने को मिला है।  तालिबान ने लड़कियों की पढ़ाई कक्षा 6 के बाद बंद कर दी है।

महिलाओं को घर से बाहर अकेले निकलने में पाबंदी लगा दी गई है।  महिलाओं को सर से पैर तक शरीर बुर्के में ढकना है और सिर्फ आंखों को खुला रखा जा सकता है।

महिलायें यदि तालिबानी फरमान नहीं मानेंगी तो उन के पति दंड के शिकार बनाये जायेंगे।  मुकदमे बाजी, जेल और इस्लाम की नाफरमानी की सजा पुरूषों को भुगतनी पड़ेगी।

इस्लाम की शिक्षा के नाम पर महिलाओं और जनता को कुचलने के पीछे तालिबान सरकार की विफलता को छुपाना है।

तालिबान सरकार का सबसे बड़ा हिमायती पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अब घर बैठ चुके हैं।

अफगानिस्तान में पिछले दो दशकों से महिलायें नौकरी, उच्च शिक्षा और कार ड्राइविंग के वीडियो शेयर करके आधुनिक विकास परस्त सोच को साबित करती रही हैं।

भारत ने आधुनिक अफगानिस्तान के निर्माण में बड़े भाई की भूमिका निभायी है। अफगानिस्तिन में उच्च शिक्षा का उन्नयन, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भारत का बड़ा योगदान रहा है।

अफगानिस्तान से बड़ी संख्यां में युवतियां पढ़ने के लिए भारत, पाकिस्तान और यूरोपीय देशों में हैं।

पिछले एक साल से तालिबान ग्रुपों ने इस्लामीकरण के नाम पर विकास का पहिया उलटा घुमाना शुरू किया हुआ है।
वामपंथी चीन कट्टर मुस्लिम तालिबान को मान्यता देकर अपना दोगलापन साबित कर रहा है।

तालिबान राज में भी अफगानिस्तान ड्रग तस्करी में नंबर एक बना हुआ है।  ड्रग कारोबारी एशिया और यूरोपीय युवाओं को नशे की लत से तबाह करने के लिए तालिबानी ग्रुपों को अपने इशारों में नचाते हैं।

महिलाओं के दमन पर अमेरिका और यूरोपीय देश धीरे से मुखर होने लगे हैं और लगता है तालिबान के सफाये के लिए दुबारा अफगानिस्तान युद्ध का मैदान न बन जाये।

https://padchihnatimes.com/escaped-president-ashraf-ghani-found-in-uae/
पदचिह्न टाइम्स।

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