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लद्दाख दर्शन : लेह में शांति स्तूप और थिक्से गोम्पा की बुद्ध प्रतिमा !

लेह की अनुभूति यूरोप स्विटजरलैंड से कहीं बेहतर , फिल्मी हीरो विजय आनंद ।

लद्दाख दर्शन : लेह में शांति स्तूप और थिक्से गोम्पा की बुद्ध प्रतिमा !
लेह की अनुभूति यूरोप देशों से कहीं बेहतर , फिल्मी हीरो विजय आनंद लेह को स्विटजरलैंड मानते रहे।

 

लेह का शांति स्तूप एक लैंड मार्क है – जिसे जापान के बौ़द्ध तकनीशियनों की मदद से बनाया गया और दलाई लामा ने इसका धर्म चक्र लोकापर्ण किया है।

” थिक्से” गोम्पा की बुद्ध प्रतिमा को दलाई लामा ने आधुनिक बुद्ध का दर्जा दिया है और ऐसी अनुपम प्रतिमा कहीं ओर नहीं है – ऐसा बताया जाता है।

लेह और जम्मू – कश्मीर की यात्रा कई मायनों में अविस्मरणीय रहती है – एक तो दिल्ली से मात्र डेड़ घंटे की हवाई यात्रा के बाद सुदूर बार्डर प्रदेश में पहुंच जाते हैं।

अगर दमखम और जोश है तो तुरंत दो घंटे विश्राम के बाद लेह की कम आक्सीजन और तेरह – चौदह हजार की हाईट पर ट्रेकिंग के लिए निकलना हमेशा चुनौती भरा रहता है।

हिंदी फिल्मों में हीरो, निर्माता – निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर विजय आनंद का पसंदीदा लोकेशन लद्दाख रहा है। हकीकत फिल्म के निर्माण 1965 से गोल्डी आनंद का यहां आना जाना रहा है।

विजय आनंद मानते थे कि लेह में रेल पहुंचा दी जाए तो हम स्विटजरलैंड के टूरिस्ट सर्किट को पीछे छोड़ सकते हैं।

इस दौरे में 17 – 18 हजार फीट पर स्थित पैगोंग – सो लेक (जिसका तीन चौथाई भाग तिब्बत, जो कि अब- चीन के कब्जे में है) और चांगला – पास पर बिना असुविधा के यात्रा कर सब अपनी शारीरिक क्षमता को चेक कर सकते हैं।

लेह में ट्रेकिंग के रिकार्ड आप की ज़िंदगी में एक अनमोल खजाना बनाते हैं और हमारे जीवन में नए अनुभव और नई खुशी का मार्ग खुल जाता है।

इस यात्रा में किसी सहयोगी की भूमिका बेहतर है – श्रीनगर – कश्मीर की विपरीत परिस्थितियों में साथी, निर्भिकता का अहसास कराते हैं। आज की युवा पीढ़ी डरती कहां हैं सो उन्हें इस यात्रा हेतु अवश्य प्रोत्साहित करें ?

– भूपत सिंह बिष्ट

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