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डॉ नीता कुकरेती की काव्यकृति ‘श्रुति से शब्द तक’ का लोकार्पण !

महाकवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर हिंदी भवन में लोकार्पण समारोह।

डॉ नीता कुकरेती की काव्यकृति ‘श्रुति से शब्द तक’ का लोकार्पण !
महाकवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर हिंदी भवन में लोकार्पण समारोह।

शिक्षाविद, गायिका  और गीतकार श्रीमती नीता कुकरेती की नई पुस्तक श्रुति से शब्द तक का

लोकार्पण हिंदी भवन में हुआ।

मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार श्रीमती राधा रतूड़ी ने

कहा – नीता कुकरेती की सामाजिक सरोकारों पर गहरी पकड़ है।

‘श्रुति से शब्द तक’ पुस्तक में संकलित गांधारी कविता की

श्रीमती राधा रतूड़ी ने सराहना की।

इस अवसर पर डॉ नीता कुकरेती ने अपनी पुस्तक से कुछ गीतों का

सस्वर पाठ किया।

पूर्व डी जी पी अनिल रतूड़ी ने कहा – हिमालय के कवि सुमित्रा नंदन पंत ने

पूरे विश्व मे हिंदी कविता को प्रतिष्ठित किया है।

उन्होंने कहा – शब्द के आने से इस धरती पर अंधकार छटा और प्रकाश फैला है।
गद्य का अर्थ पुस्तक के अंदर होता है – जबकि पद्य का अर्थ पुस्तक के बाहर मिलता है।

 

वरिष्ठ कवि असीम शुक्ल ने कहा कि पंत जी ने प्रकृति को गाया है।
कविता और मनुष्य के बीच दूरी में प्रकृति सेतु का का काम करती है।

शुक्ल जी ने कहा – कवियत्री नीता कुकरेती की कविताएं जाग्रति की ओर ले जाती हैं।

कवि के पीछे भाषा चलती है – भाषा के पीछे कवि नहीं चलता है।

 डॉ सविता मोहन ने कहा – नीता कुकरेती ने

अपनी कविताओं में शब्द पैदा किये हैं जो सरल कार्य नहीं है।
कवि अपनी कविता से ऊर्जा देता है – जीवन है तो कविता है।

हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष प्रो रामविनय सिंह ने बताया – समिति ने

साहित्य साधक सम्मान महाकवि पंत जी के नाम पर शुरू किया है।

समिति के महामंत्री हेमवती नंदन कुकरेती ने स्वागत संबोधन किया।
कार्यक्रम संचालन बीना बेंजवाल ने किया।

साहित्यकार डॉ कमला पंत ने विगत 20 मई को महाकवि पंत जी की जयंती पर

कोई कार्यक्रम नहीं होने पर रोष जताया।

संयोजक सोमप्रकाश शर्मा ने अंत में सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

–प्रस्तुति: रजनीश त्रिवेदी

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