गंगा किनारे रिजोर्ट में पसरा वीआईपी सेवा टूरिज्म !
गंगा की सहयोगी नदी ह्यूल में विधायक यमकेश्वर का रिसोर्ट यानि अब जनप्रतिनिधि भी जुटे हैं इस धंधे में।

उत्तराखंड गंगा किनारे रिजोर्ट में पसरा वीआईपी सेवा टूरिज्म !
गंगा की सहयोगी नदी ह्यूल में विधायक यमकेश्वर का रिसोर्ट यानि अब जनप्रतिनिधि भी जुटे हैं इस धंधे में।

देवभूमि उत्तराखंड की दुनिया भर में जग हंसाई जारी है – यहां सरकारी वन क्षेत्र में नेताओं को रिसोर्ट बनाने की छूट है।
वन अधिकारी सोए हैं, राजस्व और पुलिस भी दौलतवालों के आगे निरीह बने हुए हैं।
बेटी अंकिता की हत्या होने के बाद पता चलता है कि रिसोर्ट तो गैर कानूनी बना हुआ है।
एसआईटी जांच की घोषणा होती है – तब अचानक रात में जेसीबी से रिसोर्ट को तोड़ना सरकार की मंशा संशय में डाल देता है।
ऐसा रिसोर्ट (जहां वीआईपी ग्राहकों को तमाम गैर कानूनी सुविधायें बेची जा रही हैं ) को रात में तोड़ना आखिर क्यूं जरूरी हो जाता है ?
कांग्रेस जानना चाहती है – उस वीआईपी का नाम जगजाहिर करें – जिस के लिए अंकिता भंडारी की हत्या की गई।
इस अवैध रिसोर्ट में आने वाले सभी ग्राहक वीआईपी हैं और इन की पहचान सार्वजनिक बाहर आये।
मीडिया में कुछ लोग सलाह दे रहें है – अंकिता जैसी बेटियां घने जंगल में बने रिसोर्ट में नौकरी करने न आयें और माता – पिता भी उन्हें रोके !
सवाल ये भी जुड़ें हैं – सरकार नर पिशाचों को रिसोर्ट खोलने की अनुमति कैसे दे रही है ?
इन की पुलिस जांच, फौरेस्ट और राजस्व अधिकारियों की डयूटी फिर क्या है ?
अगर उत्तराखंड की बेटी अंकिता वहां सुरक्षित नहीं है तो गंगा किनारे वनक्षेत्र में आने वाले पर्यटक परिवार इन नर पिशाचों से कैसे सुरक्षित बचेंगे ?
एसआईटी का काम अंकिता के मित्र की दलेरी से आसान हुआ है।
सारे अपराधियों की धर पकड़ हो चुकी है। पुलिस कार्रवाई ने जन आक्रोश को बांधा है।
पुलिस गाहे – बगाहे इन रिसोर्टस पर छापे डालकर सक्रिय रहती तो पुलकित – सौरभ – अंकित जैसे हत्यारे जघन्य हत्या से पहले सौ बार सोचते।
एसआईटी को अपराधी ढूंडने नहीं, बस कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए साक्ष्य जुटाकर कोर्ट को संतुष्ट करना है।
रिसोर्ट अवैध था सो रात को जेसीबी चलाकर तोड़ दिया। मृतका का कमरा भी अतिक्रमण मानकर तोड़ लिया !
वीआईपी सेवा कमरा भी फोड़ दिया तो अपराधियों को कोर्ट – कचहरी के लिए क्यूँ बख्श दिया गया।
ऐसे रिसोर्टस को हतोत्साहित करने के लिए यहां आने वाले नेता, अधिकारी, व्यापारियों के नाम जाहिर होने अब जरूरी हैं क्योंकि इन की शह पर ही अंकिता जैसी बेटियां अपना जीवन खो रही हैं।

रिसोर्ट के कर्मचारी भी पाक साफ नहीं है क्योंकि 19 साल की बेटी गायब थी। लेकिन ये सब चुपचाप रिसोर्ट में नौकरी करते रहे !
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की पीड़ा बार – बार अंकिता के लिए छलक रही है। पीड़िता के गांव में मुख्यमंत्री धामी अपनी सांत्वना और राहत पहुंचा चुके हैं।
बीजेपी और संघ नेता से जुड़े एक रिसोर्ट के कांड ने ही पूरे प्रदेश को शर्मसार कर रखा है।
बीजेपी के राष्ट्रिय संगठन मंत्री बी एल संतोष को अंकिता हत्याकांड में पार्टी की ओर से शोक कार्यक्रम में भाग लेने उत्तराखंड आना पड़ा है।
ऐसे में यमकेश्व विधायक का गंगा से जुड़ी ह्यूल नदी के किनारे बनाये रिसोर्ट पर पार्टी और सरकार कैसे अंकुश लगा पायेगी।
शायद सरकार और पार्टी को धनपशुओं का विभेद करना है – अन्यथा बेटी अंकिता और हाकम सिंह जनप्रतिनिधियों की शुचिता पर जौंक की तरह चिपटे हैं।
– भूपत सिंह बिष्ट