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रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस ने किया है – लोकप्रिय क्लेमनटाउन बुद्ध स्तूप का शिलान्यास !

14 वें परम पूज्य धर्मगुरू दलाई लामा ने देहरादून बुद्धा टेंपल का लोकार्पण 28 अक्टूबर 2002 को किया।

रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस ने किया है – लोकप्रिय क्लेमनटाउन बुद्ध स्तूप का शिलान्यास !

14 वें परम पूज्य धर्मगुरू दलाई लामा ने इस बुद्धा टेंपल का लोकार्पण 28 अक्टूबर 2002 को किया।

देहरादून क्लेमनटाउन में पर्यटकों के लिए भगवान बुद्ध का मंदिर

और मठ नए टूरिस्ट स्पाट हैं।

बुद्ध स्तूप की भव्यता और सौंदर्य सब को मंत्र मुग्ध कर रहा है।

भगवान बुद्ध का शांति स्तूप का शिलान्यास प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

के कार्यकाल में हुआ है।

तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडिस ने 29 अप्रैल 2000 को बौद्ध मंदिर का शिलान्यास किया।

तिब्बत के प्राचीन मिन ड्रोल लिंग मठ ने 1965 में क्लेमनटाउन में

फिर से सक्रियता शुरू की।

तिब्बत का ये बौद्ध विहार अपने मुक्ति मार्ग के लिए पूजा जाता है।
कहते हैं – 1718 में मंगोल के लुटेरों ने तिब्बत में इस मठ को भारी नुक्सान पहुंचाया।

तब 7वें दलाई लामा (1708-1757) ने इस मठ को फिर से खड़ा

करने में बड़ी भूमिका निभायी थी।

1959 में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण किया तो भगवान बुद्ध की

शिक्षा – दीक्षा से जुड़े सभी मठों को तहस – नहस किया जाने लगा।

महायान और वज्रयान के अनुयायी तिब्बत से बाहर फिर

अपने गुरू भगवान बुद्ध के देश में शरणागत हुए।

आज क्लेमनटाउन में भगवान बुद्ध का बड़ा शिक्षा संस्थान

नगग्यूर नियंगमा अस्तित्व में आ चुका है।

बुद्धा टैंपल, मोनिस्टरी, शांति स्तूप के नाम से प्रख्यात ये निर्मल परिसर

तिब्बत की धार्मिक शिक्षा, भाषा, ज्योतिष, कलैंडर, दवाइयां,

13 सूत्र और नियंग्मा तंत्र ज्ञान के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।

14 वें परम पूज्य दलाई लामा ने देहरादून में विश्व शांति और मुक्ति मार्ग

ओ जी मिन ओजियेन मिन ड्रोल लिंग मोनिस्ट्री को अपना आशीर्वाद दिया है।

इस बौद्ध विहार में तिब्बत की भव्य मूर्तिकला, चित्रकला, गुरू परम्परा

और प्राचीन सभ्यता को जीवंत करते लामा और रिंपोछे देखे जा सकते हैं।

तिब्बत से बाहर अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाने की लड़ाई

निर्वासित शरणार्थी बिना थके और हारे लड़ रहे हैं।
– भूपत सिंह बिष्ट

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