दून पुस्तकालय ने मनाया डॉ. एस.आर. रंगनाथन पुस्तकालय दिवस !
मुख्य वक्ता रमाकांत बेंजवाल ने लिपि, पुस्तक और पुस्तकालय विज्ञान की सामाजिक महता को रेखांकित किया।

दून पुस्तकालय ने मनाया डॉ. एस.आर. रंगनाथन पुस्तकालय दिवस !
मुख्य वक्ता रमाकांत बेंजवाल ने लिपि, पुस्तक और पुस्तकालय विज्ञान की सामाजिक महता को रेखांकित किया।
पुस्तकालय विज्ञान के जनक डाॅ.एस.आर. रंगनाथन का 130वां जन्मदिवस 12 अगस्त , राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के रुप में मनाया गया।
कार्यक्रम का आयोजन दून पुस्तकालय एवम् शोध केन्द्र तथा देव भूमि लाइब्रेरी एसोसिएशन समिति, उत्तराखण्ड ने उत्तरांचल प्रेस क्लब सभागार में किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रमाकांत बेंजवाल ने अपने सार गर्भित उदबोधन में लिपि, पुस्तक और पुस्तकालय की महता को सभ्य समाज के उद्भव में रेखांकित किया।
राजभवन के पुस्तकालय अध्यक्ष बेंजवाल ने बताया पांच हजार साल पहले लिपि की खोज के साथ, भोजपत्र पर पांडुलिपि लेखन आरंभ हुआ।
आज पुस्तकें आफसेट प्रिंटिंग प्रेस से होकर, अब ई बुक के आकार में आधुनिक सभ्य समाज के विकास की कहानी कह रही है।
सभ्य समाज में ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं है ! ज्ञान का भंडारण पुस्तकों और पुस्तकालय में है।
विश्व में 6500 भाषायें प्रचलित हैं और 13 करोड़ पुस्तकों के टाइटिल रजिस्टर्ड हैं।
कई पुस्तकों के संस्करण तो लाख और करोड़ की संख्या लांघकर निजी और सार्वजनिक पुस्तकालयों में सजे हैं।
आधुनिक डिजिटल युग में इलैक्ट्रानिक बुक ने किताबों को विश्व के कोने – कोने तक सुलभ बना दिया है। इन पुस्तकों का संग्रहण ओडियो, वीडियो बुक के रूप में कंप्यूटर के एक क्लिक की दूरी पर उपलब्ध है।
समय आ गया है – हमारे पुस्तकालयों को छपी हुई और ई – बुक दोनों से युवाओं के लिए लैस होना है।
विश्व में चायनीज, स्पेनिश, अंग्रेजी के बाद हिंदी भाषा का स्थान है। डिजिटल बुक के माध्यम से हमारी भाषा का स्थान विश्व में बेहतर हो सकता है।
पुस्तकों का उपयोग मनोरंजन के साथ सीख के लिए होने से पुस्तकालयों की सार्थकता साबित होगी – दून पुस्तकालय और शोध केंद्र में आने युवा पाठक अब रोजगार परीक्षाओं में भी सफलता पा रहे हैं।
पुस्तकालयों में पाठक संख्या बढ़ाने के लिए युवाओं के लिए यू टयूब जैसी ई लाइब्रेरी में अपग्रेड होना जरूरी हो गया है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष सुजीत कुमार दास ने कहा – दून लाइब्रेरी के विकास में स्वर्गीय नारायण दत तिवारी ने पांच करोड़ की राशि देकर देहरादून में राष्ट्रीय स्तर के पुस्तकालय की आधार शिला रखी थी।
दून लाइब्रेरी अब अपना स्थान उत्तराखंड में हासिल कर रहा है। आज युवाओं को लाइब्रेरी से जोड़ने की बड़ी जरूरत है। युवाओं में ज्ञान की ललक बढ़ाने के और अधिक प्रयास करने हैं।
जल्दी ही दून लाइब्रेरी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहद नए भवन में अंतरित होने वाली है।
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के निदेशक एन.रवि.शंकर ने कहा – लाइब्रेरी सांइस के जनक डा एस आर रंगनाथन ने पुस्तकों के वर्गीकरण की तकनीक को इजाद किया है।
आज आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पैनकार्ड में वर्गीकरण की उसी धारणा का इस्तेमाल 80 करोड़ नागरिकों के डाटा वर्गीकरण में किया जाता है।
अब डिजिटल और मौलिक दोनों पुस्तकों से ज्ञान अर्जन करने का समय आ गया है।
पाठक पुस्तकालय की जान होते हैं और युवाओं की आवश्यकता अनुसार पुस्तकालयों को अपग्रेड करना नितांत जरूरी हो गया है।
नए भवन के निर्माण में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारी एवं सीईओ स्मार्ट सिटी से लगातार बातचीत जारी है।
अगामी अक्टूबर माह तक दून लाइब्रेरी नए परिसर में कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल पुस्तकों से सज्जित होने की आशा है।
कार्यक्रम का संचालन दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के प्रोग्राम एसोसिएट चन्द्रशेखर तिवारी ने किया।
– भूपत सिंह बिष्ट