चाचा नेहरू और देश के गौरवशाली इतिहास को भूलाने की मुहिम !
पार्टी पालिटिक्स और धार्मिक उन्माद ने बाल दिवस का जोश फीका कर दिया।

चाचा नेहरू और देश के गौरवशाली इतिहास को भूलाने की मुहिम !
पार्टी पालिटिक्स और धार्मिक उन्माद ने बाल दिवस का जोश फीका कर दिया।
आज उत्तराखंड के लोकपर्व इगास बग्वाल की शुभकामनायें सोशल मीडिया पर तारी हैं। ऐसे में एक टीचर ने चिल्ड्रन्स डे का संदेश भेज कर हतप्रद कर दिया।
मोबाइल में कैद ज़िंदगी अब प्रायोजित लगती है – राजनेता रोज एक इंवेट दिखाते रहते हैं और हम उस पर चर्चा में लीन समाज के अन्य वर्गों को भूलते जा रहे हैं।
मैं जब चार साल का था तब देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का देहांत हो गया – प्राइमरी स्कूल में बाल दिवस पर बिस्कुट पाने की होड़ मचती थी।
मिडिल स्कूल में नेहरू जी के जन्मदिवस को चिल्ड्रन्स डे के रूप में मनाने का पता चला – नेहरू जी ने आजादी की लड़ाई में भाग लिया, जेल गए।
आजाद भारत के प्रधानमंत्री बने, उन्हें बच्चों से प्यार था। गुलाब पसंद था, शेरवानी और चुड़ीदार पजामा पहनते थे।
नौकरी के लिए जनरल नालिज की तैयारी करते हुए पता चला – प्रधानमंत्री नेहरू 17 साल तक देश के पहले प्रधानमंत्री रहे और विलायत से बैरिस्टरी की शिक्षा पास कर के आए थे।
पिता मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद के जाने माने रईस और वकील थे। आजादी के बाद अपनी संपत्ति आनंद भवन देश को समर्पित कर दिया ताकि नए निर्माण के संसाधन बचाये जा सके।
आजादी आंदोलन के दौरान नेहरु ने लगभग 9 साल का कारावास भुगता है मगर आज भी एक फरेब उनके लिए बुना जाता रहा है – आज स्वर्गवासी नेहरु की 132 वीं जयंती है और 57 साल पहले देह त्याग चुके हैं।
जवाहर लाल नेहरू ने कई विश्व प्रसिद्ध किताबे अंग्रेजी में लिखी हैं – भारत एक खोज ! उन की बड़ी उपलब्धि प्रारब्ध से आधुनिक भारत के वैभव, संस्कृति और इतिहास का परिचय कराती है।
पिता के बेटी के नाम खत – जेल से बेटी इंदिरा को सामान्य ज्ञान देने के लिए लिखे 30 खत – आज पुस्तक के रूप में विश्व विख्यात है।
1950 में आजाद भारत को लोकतांत्रिक समाजवादी देश का संविधान मिला। आज के विज्ञान और तकनीक से सुसज्जित भारत के नव निर्माण में चाचा नेहरू का योगदान कभी भूलाया नहीं जा सकता है।
नए भारत के वैभव में अनेक नामी और गुमनाम देशभक्तों का योगदान हैं। नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 में और मृत्यु 27 मई 1964 को हुई।
पदचिह्न टाइम्स।